Maharashtra: मुंबई का मशहूर Institute of Chemical Technology (ICT) अब अपना स्टेटस बदल सकता है। महाराष्ट्र सरकार ने संस्थान को ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ से हटाकर ‘स्टेट टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी’ बनाने का
Maharashtra: मुंबई का मशहूर Institute of Chemical Technology (ICT) अब अपना स्टेटस बदल सकता है। महाराष्ट्र सरकार ने संस्थान को ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ से हटाकर ‘स्टेट टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी’ बनाने का सुझाव दिया है। इस बदलाव को लेकर संस्थान के अंदर काफी चर्चा है और कई लोग इसका विरोध भी कर रहे हैं।
स्टेट यूनिवर्सिटी बनने का प्रस्ताव क्यों आया
दिसंबर 2025 में उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल की अध्यक्षता में एक बैठक हुई थी। इसमें ICT अधिकारियों ने बताया कि डीम्ड यूनिवर्सिटी होने की वजह से उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर और रिसर्च के लिए सरकारी फंड मिलने में दिक्कत आ रही है। कई केंद्रीय एजेंसियां इसे प्राइवेट यूनिवर्सिटी की तरह देखती हैं, जिससे सरकारी स्कीमों का लाभ नहीं मिल पाता। इसी समस्या को देखते हुए Directorate of Technical Education (DTE) ने अप्रैल 2026 में संस्थान से इस बदलाव का प्रस्ताव मांगा है।
प्रोफेसर्स और पूर्व छात्रों को किस बात का डर है
संस्थान के फैकल्टी और पूर्व छात्रों ने इस बदलाव का कड़ा विरोध किया है। उनका मानना है कि सरकारी नियंत्रण बढ़ने से ICT की आजादी और ग्लोबल साख कम हो जाएगी। सबसे बड़ा डर रिटायरमेंट की उम्र को लेकर है। अभी प्रोफेसर 65 साल तक काम कर सकते हैं, लेकिन स्टेट यूनिवर्सिटी बनने पर यह उम्र घटकर 60 साल हो सकती है, जिससे कई सीनियर प्रोफेसर नौकरी से हाथ धो बैठेंगे।
संस्थान का अब तक का क्या रुख है
ICT ने गुरुवार, 30 अप्रैल 2026 को एक बयान जारी कर कहा कि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। संस्थान इस प्रस्ताव के फायदे और नुकसान पर विचार करेगा। फैसला लेने से पहले फैकल्टी, स्टाफ, छात्रों और पूर्व छात्रों की राय ली जाएगी। वहीं, पूर्व डायरेक्टर प्रो. एम. एम. शर्मा का कहना है कि ICT को संसद के एक्ट के जरिए ‘सेंट्रल यूनिवर्सिटी’ का दर्जा मिलना चाहिए ताकि फंड की समस्या भी हल हो जाए और आजादी भी बनी रहे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ICT को स्टेट यूनिवर्सिटी बनाने का सुझाव क्यों दिया गया?
डीम्ड यूनिवर्सिटी स्टेटस के कारण ICT को सरकारी फंड और स्कीमों का लाभ मिलने में दिक्कत हो रही थी, जिसे दूर करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने यह सुझाव दिया है।
संस्थान के प्रोफेसर इस बदलाव का विरोध क्यों कर रहे हैं?
प्रोफेसरों को डर है कि इससे संस्थान की स्वायत्तता (Autonomy) खत्म होगी और उनकी रिटायरमेंट की उम्र 65 साल से घटाकर 60 साल कर दी जाएगी।