Maharashtra: मुंबई में ऑटिज्म से जूझ रहे बच्चों के लिए एक नई उम्मीद जगी है। Indian Council of Medical Research (ICMR) ने एक ऐसे क्लिनिकल ट्रायल को मंजूरी दी है, जिसमें बच्चों के पेट के माइक्रोब्स (microbes) यानी बैक्टीरि
Maharashtra: मुंबई में ऑटिज्म से जूझ रहे बच्चों के लिए एक नई उम्मीद जगी है। Indian Council of Medical Research (ICMR) ने एक ऐसे क्लिनिकल ट्रायल को मंजूरी दी है, जिसमें बच्चों के पेट के माइक्रोब्स (microbes) यानी बैक्टीरिया को बदलकर इस बीमारी के असर को कम करने की कोशिश की जा रही है। हैदराबाद के Resplice Autism Research Foundation इस रिसर्च को आगे बढ़ा रहा है और अब मुंबई से प्रतिभागियों की तलाश की जा रही है।
क्या है यह नया इलाज और यह कैसे काम करता है?
इस ट्रायल में Faecal Microbiota Transplant (FMT) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। Resplice Autism Research Foundation के चेयरमैन और कार्डियोलॉजिस्ट Dr. Chandrasekhar Thodupunuri के मुताबिक, इस प्रक्रिया में एक स्वस्थ व्यक्ति के मल से अच्छे बैक्टीरिया लेकर मरीज के पाचन तंत्र में डाले जाते हैं। इससे पेट के माइक्रोबायोम का संतुलन ठीक होता है, जिसका सीधा असर ऑटिज्म के लक्षणों पर पड़ सकता है।
ट्रायल के शुरुआती नतीजे और जरूरी जानकारी
फाउंडेशन का दावा है कि अब तक के शुरुआती नतीजों में 70% से ज्यादा बच्चों में सुधार देखा गया है। एक अभिभावक S. Hameed ने बताया कि FMT शुरू करने के तीन हफ्ते के भीतर उनके आठ साल के बेटे में काफी सुधार आया। हालांकि, डॉक्टर का कहना है कि इस इलाज को पूरी तरह से आम जनता के लिए उपलब्ध होने में अभी कम से कम पांच साल का समय लग सकता है।
मुंबई में फ्री हेल्थ कैंप कब और कहां होगा?
ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों के पेट के स्वास्थ्य की जांच के लिए एक मुफ्त कैंप लगाया जा रहा है। इसकी जानकारी नीचे दी गई है:
| तारीख |
26 अप्रैल |
| जगह |
मैसूर ऑडिटोरियम, माटुंगा (मुंबई) |
| उद्देश्य |
गट हेल्थ असेसमेंट और माइक्रोबायोम टेस्टिंग |
| सहयोगी संस्थाएं |
शिव सेना मेडिकल हेल्प सेल, माझा ‘सु’ संकल्प अभियान और करुणा सेवा ट्रस्ट |