Maharashtra: दक्षिण मुंबई की New Akash Ganga Cooperative Housing Society ने सुरक्षा को लेकर लड़ी गई 14 साल लंबी कानूनी लड़ाई जीत ली है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि पहली मंजिल के इमरजेंसी फायर एग्जिट को वापस ठीक किया जाए और
Maharashtra: दक्षिण मुंबई की New Akash Ganga Cooperative Housing Society ने सुरक्षा को लेकर लड़ी गई 14 साल लंबी कानूनी लड़ाई जीत ली है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि पहली मंजिल के इमरजेंसी फायर एग्जिट को वापस ठीक किया जाए और सीढ़ियों के नीचे बने अवैध कमरे को दो महीने के भीतर गिराया जाए।
क्या था पूरा मामला और कोर्ट ने क्या कहा
यह मामला भुलाभाई देसाई रोड पर स्थित 56 साल पुरानी हाउसिंग सोसाइटी का है। सोसाइटी के पूर्व केयरटेकर Ram Shreshtha ने फायर एग्जिट की सीढ़ियों के नीचे ग्राउंड फ्लोर की जगह पर अवैध रूप से अपना घर बना लिया था। सोसाइटी ने इसके खिलाफ अक्टूबर 2011 में सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जज R.S. Aradhye ने पूर्व केयरटेकर के इस काम को गैरकानूनी और शून्य घोषित कर दिया है।
दस्तावेजों और सुरक्षा नियमों पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
कोर्ट ने साफ किया कि सिर्फ आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेजों के आधार पर किसी जगह का मालिकाना हक ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। जज ने इस बात पर जोर दिया कि आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने के लिए बनाया गया रास्ता यानी फायर एग्जिट पूरी तरह खाली होना चाहिए और वहां किसी भी तरह का कब्जा नहीं होना चाहिए।
अब आगे क्या होगा
कोर्ट ने यह आदेश शुक्रवार, 22 मई 2026 को सुनाया। अब सोसाइटी को दो महीने का समय दिया गया है ताकि अवैध कमरे को ढहाकर फायर एग्जिट को फिर से चालू किया जा सके। इससे सोसाइटी के निवासियों की सुरक्षा पहले से बेहतर होगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
New Akash Ganga सोसाइटी ने कोर्ट में केस कब किया था?
सोसाइटी ने सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और अवैध कब्जे के खिलाफ अक्टूबर 2011 में सिविल कोर्ट में याचिका दायर की थी।
कोर्ट ने अवैध कब्जे के बारे में क्या फैसला सुनाया?
जज R.S. Aradhye ने पूर्व केयरटेकर द्वारा बनाए गए कमरे को अवैध बताया और आदेश दिया कि इसे दो महीने के भीतर गिराकर फायर एग्जिट को बहाल किया जाए।