Maharashtra: मुंबई की सड़कों और तटीय इलाकों को होर्डिंग्स के जाल से मुक्त करने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। घाटकोपर हादसे के बाद अब BMC और Maharashtra Maritime Board (MMB) ने विज्ञापन लगाने के नियमों को बहुत सख्त कर द
Maharashtra: मुंबई की सड़कों और तटीय इलाकों को होर्डिंग्स के जाल से मुक्त करने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। घाटकोपर हादसे के बाद अब BMC और Maharashtra Maritime Board (MMB) ने विज्ञापन लगाने के नियमों को बहुत सख्त कर दिया है। अब बिना लिखित अनुमति और स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट के कोई भी विज्ञापन बोर्ड नहीं लगाया जा सकेगा।
BMC के नए नियमों में क्या बदलाव हुए हैं?
BMC ने नवंबर 2025 में नई गाइडलाइन्स जारी की थीं ताकि शहर की खूबसूरती बनी रहे और हादसे न हों। अब शहर में 40 फीट x 40 फीट से बड़े होर्डिंग्स लगाने पर पूरी तरह रोक है। फुटपाथ और बिल्डिंग की छतों पर विज्ञापन लगाना अब मना है। डिजिटल बोर्ड के लिए चमक (brightness) की सीमा तय की गई है और इन्हें केवल मॉल या पेट्रोल पंप जैसे नियंत्रित इलाकों में ही लगाने की अनुमति है।
MMB ने तटीय क्षेत्रों के लिए क्या नियम बनाए हैं?
20 अप्रैल 2026 को Maharashtra Maritime Board ने नए नियम लागू किए हैं। अब जेटी, पोर्ट और तटीय इलाकों में विज्ञापन के लिए ‘Advertising Authority’ से लिखित मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। इन नियमों की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
- तंबाकू, शराब और पान मसाला के विज्ञापनों पर पूरी तरह रोक है।
- जेटी चैनल के 50 मीटर के दायरे में कोई विज्ञापन नहीं लगेगा।
- डिजिटल और LED पैनल लगाने वालों को सबसे ज्यादा फीस देनी होगी।
- बड़े विज्ञापनों के लिए लाइसेंस प्राप्त इंजीनियर से स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट लेना जरूरी है।
होर्डिंग्स की सुरक्षा और निगरानी कैसे होगी?
प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठाए हैं। 300 स्क्वायर फीट से बड़े होर्डिंग्स के लिए BMC रजिस्टर्ड इंजीनियर की रिपोर्ट देनी होगी। हर दो साल में सभी होर्डिंग्स का स्ट्रक्चरल ऑडिट करना अनिवार्य होगा। पुरानी और जर्जर इमारतों (C1 और C2A कैटेगरी) पर विज्ञापन लगाना अब गैरकानूनी है। साथ ही, परमिट रिन्यू करने की समय सीमा को 6 महीने से घटाकर 3 महीने कर दिया गया है और पूरी प्रक्रिया अब ऑनलाइन होगी।