Mumbai में भारी बारिश से हाहाकार, 13 लोगों की मौत और लोकल ट्रेनें बुरी तरह प्रभावित
Maharashtra: मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में पिछले कुछ दिनों से हो रही रिकॉर्ड तोड़ बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। जुलाई की इस भारी बारिश में अब तक कम से कम 13 लोगों की जान जा चुकी है। शहर के कई इलाकों में पान
Maharashtra: मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में पिछले कुछ दिनों से हो रही रिकॉर्ड तोड़ बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। जुलाई की इस भारी बारिश में अब तक कम से कम 13 लोगों की जान जा चुकी है। शहर के कई इलाकों में पानी भरने से लाखों लोग परेशान हैं और यातायात पूरी तरह प्रभावित हुआ है।
मौसम विभाग (IMD) ने 8 जुलाई को मुंबई, ठाणे और पुणे के घाट इलाकों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया था, जिसमें तेज हवाओं और भारी बारिश की चेतावनी दी गई थी। इससे पहले पिछले सात दिनों तक रेड अलर्ट जारी रहा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस स्थिति को ‘फोर्स मेज्योर’ (अपरिहार्य घटना) बताया है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें और जर्जर इमारतों, बिजली के खंभों और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहें।
बारिश का असर ट्रांसपोर्ट पर सबसे ज्यादा पड़ा है, जिसकी जानकारी नीचे दी गई है:
| सेवा | प्रभाव और स्थिति |
|---|---|
| Western Railway | वसई, नालासोपारा और विरार के बीच जलभराव से ट्रेनें 25-30 मिनट लेट रहीं। |
| Central Railway | नेरल और कर्जत के बीच पानी भरने और ट्रैक खराब होने से सेवा अस्थायी रूप से बंद रही। |
| Harbour Line | माहिम और गोरेगांव के बीच सामान्य स्थिति रही, लेकिन CSMT जाने वाली ट्रेनें 8-10 मिनट लेट थीं। |
| Long Distance Trains | सूरत के सचिन स्टेशन और वसई-विरार सेक्शन में पानी भरने से गुजरात जाने वाली ट्रेनें रद्द या डायवर्ट हुईं। |
| Flights | 6 जुलाई को 17 उड़ानें रद्द हुईं और 200 से ज्यादा फ्लाइट्स लेट रहीं। |
शहर के अंधेरी, चेंबूर और विक्रोली जैसे निचले इलाकों में भारी जलभराव हुआ, जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही। मंगलवार रात को तुलसी और विहार झीलें भी ओवरफ्लो हो गईं। BMC के मुताबिक 8 जुलाई को पेड़ों के गिरने और दीवारों के ढहने की कई शिकायतें मिलीं। स्कूलों की बात करें तो ठाणे और मुंबई में स्कूल खुले रहे, लेकिन पालघर जिले में सावधानी के तौर पर स्कूलों की छुट्टी रखी गई।
शहरी नियोजन के जानकारों का कहना है कि मुंबई में ड्रेनेज सिस्टम पुराना हो चुका है और बुनियादी ढांचे के विकास के समय पर्यावरण का ध्यान नहीं रखा गया, जिसकी वजह से हर साल ऐसी स्थिति पैदा होती है।