Maharashtra: मुंबई के सरकारी अस्पतालों के ब्लड बैंकों में खून की भारी कमी हो गई है। इस वजह से मरीजों, खासकर Thalassemia से जूझ रहे लोगों को बहुत परेशानी हो रही है। खून न मिलने के कारण मरीजों के रिश्तेदार अब प्राइवेट ब्लड
Maharashtra: मुंबई के सरकारी अस्पतालों के ब्लड बैंकों में खून की भारी कमी हो गई है। इस वजह से मरीजों, खासकर Thalassemia से जूझ रहे लोगों को बहुत परेशानी हो रही है। खून न मिलने के कारण मरीजों के रिश्तेदार अब प्राइवेट ब्लड बैंकों का रुख कर रहे हैं, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
अस्पतालों में खून की क्या स्थिति है?
मुंबई के कई बड़े अस्पतालों में स्टॉक बहुत कम है। KEM Hospital में रोजाना 100-129 यूनिट की जरूरत होती है, लेकिन वहां सिर्फ 65 यूनिट उपलब्ध हैं। St. George’s Hospital में 100 Thalassemia मरीजों के लिए रोजाना 10-15 यूनिट चाहिए, पर वहां केवल 4 यूनिट बचे हैं। कुल 12 सरकारी केंद्रों पर मिलाकर सिर्फ 685 यूनिट खून बचा है। AB-negative और O-negative जैसे जरूरी ब्लड ग्रुप्स की स्थिति और भी खराब है।
खून की कमी के मुख्य कारण क्या हैं?
विशेषज्ञों के मुताबिक अप्रैल और मई में छात्रों की परीक्षाएं और गर्मियों की छुट्टियों के कारण ब्लड डोनेशन कैंप कम हो जाते हैं। साथ ही, भीषण गर्मी की वजह से कई कैंप रद्द करने पड़े हैं। Nanasaheb Dharmadhikari Pratishthan ने बताया कि 17 मई को गर्मी के कारण 52 कैंप स्थगित हुए, जिससे करीब 15,000 यूनिट खून की कमी हुई। इसके अलावा, फरवरी 2026 में BMC द्वारा कैंप वाहनों की मंजूरी में देरी और अंतर-राज्यीय ब्लड ट्रांसफर पर रोक से भी सप्लाई घटी है।
अधिकारियों और डॉक्टरों के बयानों में क्या अंतर है?
State Blood Transfusion Council (SBTC) का कहना है कि महाराष्ट्र में 35,942 यूनिट और मुंबई में 5,110 यूनिट का स्टॉक है, जो पर्याप्त है। लेकिन Sion Hospital के डॉ. मोहन जोशी और अन्य डॉक्टरों ने इसे पब्लिक इमरजेंसी बताया है। उनका कहना है कि वर्तमान स्टॉक रोजाना की जरूरत के लिए काफी नहीं है। कई अस्पताल इमरजेंसी केस को प्राथमिकता दे रहे हैं और गैर-जरूरी सर्जरी या ट्रांसफ्यूजन को कम कर रहे हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मुंबई के किन अस्पतालों में खून की कमी देखी गई है?
KEM, St. George’s, Rajawadi, JJ Hospital, GT Hospital, Sion, Nair और Cama Hospital समेत कई सरकारी ब्लड बैंकों में स्टॉक काफी कम है।
Thalassemia मरीजों पर इसका क्या असर पड़ रहा है?
महाराष्ट्र में 13,000 से ज्यादा Thalassemia केस हैं, जिनमें मुंबई में सबसे ज्यादा 3,420 हैं। इन मरीजों को नियमित खून चाहिए होता है, लेकिन कमी के कारण उनके परिजनों को अब खुद डोनर ढूंढने या महंगे प्राइवेट बैंकों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।