Mumbai में सैलरी का अंतर कम हुआ, लेकिन काम करने वाली महिलाओं की संख्या अब भी कम
Maharashtra: मुंबई में नौकरीपेशा महिलाओं और पुरुषों की सैलरी के बीच का अंतर काफी कम हो गया है। नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (NSO) के पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे 2025 के मुताबिक, नियमित सैलरी वाली नौकरियों में महिलाएं अब पुरुष
Maharashtra: मुंबई में नौकरीपेशा महिलाओं और पुरुषों की सैलरी के बीच का अंतर काफी कम हो गया है। नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (NSO) के पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे 2025 के मुताबिक, नियमित सैलरी वाली नौकरियों में महिलाएं अब पुरुषों के मुकाबले 98 प्रतिशत कमाई कर रही हैं। हालांकि, शहर में काम करने वाली महिलाओं की कुल संख्या राष्ट्रीय औसत से कम है।
सैलरी के मामले में मुंबई देश के बड़े शहरों में आठवें नंबर पर है। यहाँ नियमित नौकरी करने वाली महिलाओं की औसत मासिक सैलरी 35,788 रुपये है, जबकि पुरुषों की औसत सैलरी 36,453 रुपये है। लेकिन जब बात दिहाड़ी मजदूरी की आती है, तो स्थिति काफी अलग है। अनौपचारिक क्षेत्र में महिला मजदूरों को एक दिन के सिर्फ 211 रुपये मिलते हैं, जबकि पुरुषों को इसी काम के लिए 712 रुपये दिए जाते हैं।
कामकाजी आबादी के आंकड़ों पर नजर डालें तो मुंबई में महिलाओं की भागीदारी दर (LFPR) 26.9 प्रतिशत है, जो कि शहरी राष्ट्रीय औसत 27.7 प्रतिशत से कम है। वहीं पुरुषों की भागीदारी दर 74.4 प्रतिशत है। मुंबई की अर्थव्यवस्था सेवाओं पर आधारित है, इसलिए यहाँ 71.7 प्रतिशत कामकाजी महिलाएं नियमित सैलरी वाली नौकरियों में हैं, जो राष्ट्रीय औसत 50.9 प्रतिशत से काफी ज्यादा है।
| विवरण | महिलाएं (मुंबई) | पुरुष (मुंबई) |
|---|---|---|
| नियमित मासिक सैलरी (औसत) | 35,788 रुपये | 36,453 रुपये |
| दिहाड़ी मजदूरी (प्रति दिन) | 211 रुपये | 712 रुपये |
| लेबर फोर्स भागीदारी दर (LFPR) | 26.9% | 74.4% |
| वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (WPR) | 25.6% | 72.1% |
सर्वे में यह बात सामने आई कि बड़े शहरों में करीब 68.7 प्रतिशत महिलाएं बच्चों की देखभाल और घर संभालने की जिम्मेदारियों की वजह से काम पर नहीं जा पाती हैं। केंद्र सरकार के श्रम और रोजगार मंत्रालय ने इस स्थिति को सुधारने के लिए लचीले कामकाज के घंटे, समान वेतन और सस्ते चाइल्डकेयर जैसे उपायों पर काम शुरू किया है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाकर 55 प्रतिशत करना है।