Mumbai में भारी बारिश से बाढ़ का खतरा, Experts ने ‘Sponge City’ और AI तकनीक अपनाने की सलाह दी

Maharashtra: मुंबई और आसपास के इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। IMD ने 7 जुलाई 2026 के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है, जिसके चलते एहतियात के तौर पर स्कूलों और कॉलेजों को

Maharashtra: मुंबई और आसपास के इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। IMD ने 7 जुलाई 2026 के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है, जिसके चलते एहतियात के तौर पर स्कूलों और कॉलेजों को बंद रखा गया। पालघर में भारी बारिश से एक व्यक्ति की जान चली गई और सैंकड़ों परिवारों को सुरक्षित जगहों पर पहुँचाया गया, वहीं कर्जत-लोनावला घाट सेक्शन में लैंडस्लाइड से रेल यातायात प्रभावित हुआ है।

शहर में बार-बार आने वाली बाढ़ को रोकने के लिए विशेषज्ञों ने ‘ब्लू-ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर’ और ‘वॉटरशेड प्लानिंग’ की जरूरत बताई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मुंबई को ‘स्पंज सिटी’ (Sponge City) के तौर पर विकसित करना होगा, जिसमें ऐसी सड़कों और पार्कों का निर्माण किया जाए जो बारिश के पानी को सोख सकें। साथ ही, जलवायु परिवर्तन को देखते हुए ड्रेनेज सिस्टम को बेहतर बनाने और AI आधारित फ्लड फोरकास्टिंग सिस्टम का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।

इस बीच, शिव सेना (UBT) ने राज्य सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि मेट्रो लाइनों में छत से पानी टपकना, खुले मैनहोल और उखड़े हुए पेड़ों ने प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है। आरोप है कि मानसून से पहले नालों की सफाई (desilting) का काम ठीक से नहीं किया गया, जिससे सड़कों पर पानी जमा हो रहा है।

बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए BMC ने NDMA को 12,705 करोड़ रुपये का एक प्रस्ताव भेजा है। इस योजना में कई अहम कदम शामिल हैं:

  • स्पंज पार्क: 200 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण।
  • बायोस्वेल्स (Bioswales): 100 करोड़ रुपये का प्रावधान।
  • पारगम्य फुटपाथ (Permeable Pavements): 120 करोड़ रुपये का खर्च।
  • नए नियम: नई इमारतों में ग्रीन रूफटॉप, वर्टिकल गार्डन और रेनवाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देना।

तकनीकी मोर्चे पर IIT Bombay ने एक AI आधारित सिस्टम बनाया है, जो 93% सटीकता के साथ बता सकता है कि किन इलाकों में बाढ़ आएगी और पानी का स्तर कितना होगा। यह सिस्टम सिर्फ बारिश ही नहीं, बल्कि मिट्टी की नमी और जमीन के इस्तेमाल जैसे कारकों को भी देखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रकृति आधारित तरीके मैनमेड समाधानों के मुकाबले 50% सस्ते और 28% ज्यादा असरदार होते हैं।