Mumbai में भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, जानिए क्यों हर साल डूबती है मायानगरी

Maharashtra: मुंबई में 8 जुलाई को हुई भारी बारिश ने एक बार फिर शहर की रफ्तार रोक दी। सड़कों पर पानी भरने से ट्रांसपोर्ट ठप हो गया और आम लोगों का जीना मुश्किल हो गया। प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है और कई इलाकों में जलजमाव

Maharashtra: मुंबई में 8 जुलाई को हुई भारी बारिश ने एक बार फिर शहर की रफ्तार रोक दी। सड़कों पर पानी भरने से ट्रांसपोर्ट ठप हो गया और आम लोगों का जीना मुश्किल हो गया। प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है और कई इलाकों में जलजमाव के कारण ट्रेन सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।

IMD ने बुधवार को मुंबई और आसपास के जिलों में तेज हवाओं के साथ भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी थी, हालांकि 9 जुलाई से राहत मिलने की उम्मीद है। इस बारिश के कारण Western Railway के नवसारी-मरोली जैसे सेक्शन में पानी भर गया, जिससे ट्रेनों की आवाजाही में दिक्कत आई। हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्थिति की समीक्षा की और राज्य मशीनरी को हाई अलर्ट पर रखा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुख्यमंत्री से बात कर केंद्र की मदद का भरोसा दिया।

बारिश का असर इतना ज्यादा था कि 7 जुलाई को स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टी घोषित कर दी गई और प्राइवेट ऑफिसों को वर्क फ्रॉम होम की सलाह दी गई। महाराष्ट्र में पिछले कुछ दिनों में बारिश से जुड़ी घटनाओं में कम से कम 13 लोगों की जान गई है, जिसमें अकेले पालघर जिले में 10 मौतें दर्ज की गई हैं। इसके अलावा मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के नए टनल वाले हिस्से में लैंडस्लाइड होने से रास्ता कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा था।

सवाल यह उठता है कि बुनियादी ढांचे में सुधार के बावजूद मुंबई हर साल क्यों डूबती है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसका सबसे बड़ा कारण पुराना ड्रेनेज सिस्टम है, जो 1900 की शुरुआत में बना था और एक घंटे में केवल 25 मिलीमीटर बारिश ही झेल सकता है। शहर में तेजी से बढ़ते कंक्रीट के जंगल, मैंग्रोव का कम होना और प्राकृतिक नालों पर कब्जा होने से पानी सोखने की क्षमता खत्म हो गई है। जब भारी बारिश के साथ समुद्र में हाई टाइड होता है, तो पानी वापस शहर की तरफ आता है और नालों से बाहर नहीं निकल पाता।

कारण प्रभाव
पुराना ड्रेनेज सिर्फ 25mm बारिश झेलने की क्षमता
शहरीकरण मैंग्रोव और वेटलैंड्स का खत्म होना
कंक्रीटीकरण जमीन का पानी सोखने की क्षमता कम होना
समुद्री लहरें हाई टाइड के समय पानी का वापस आना
नागरिक लापरवाही कचरे से नालों का जाम होना
जलवायु परिवर्तन कम समय में बहुत ज्यादा बारिश होना

Climate Change ने मानसून के व्यवहार को बदल दिया है। अब बारिश लंबे समय तक होने के बजाय बहुत कम समय में बहुत तेज होती है, जिससे फ्लैश फ्लड और लैंडस्लाइड का खतरा बढ़ गया है। अरब सागर का तापमान बढ़ने से बारिश और ज्यादा तीव्र हो गई है। आंकड़ों के अनुसार, 1981-2000 के मुकाबले 2001-2024 के बीच मुंबई की औसत मानसूनी बारिश में करीब 15% की बढ़ोतरी हुई है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी कहा है कि कचरा फेंकने और अतिक्रमण के कारण जलजमाव की समस्या और बढ़ जाती है।