Maharashtra : मुंबई के डॉक्टरों ने शादी और प्रेग्नेंसी की प्लानिंग कर रहे कपल्स को थालेसीमिया स्क्रीनिंग कराने की सलाह दी है। वर्ल्ड थालेसीमिया डे के मौके पर एक्सपर्ट्स ने बताया कि समय पर खून की जांच और जेनेटिक काउंसलिंग
Maharashtra : मुंबई के डॉक्टरों ने शादी और प्रेग्नेंसी की प्लानिंग कर रहे कपल्स को थालेसीमिया स्क्रीनिंग कराने की सलाह दी है। वर्ल्ड थालेसीमिया डे के मौके पर एक्सपर्ट्स ने बताया कि समय पर खून की जांच और जेनेटिक काउंसलिंग कराने से आने वाले बच्चों को इस गंभीर बीमारी से बचाया जा सकता है। महाराष्ट्र में इस बीमारी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे अब सरकार और मेडिकल एक्सपर्ट्स जागरूकता अभियान चला रहे हैं।
थालेसीमिया स्क्रीनिंग क्यों है जरूरी और इसके क्या लक्षण हैं?
डॉक्टरों के मुताबिक, भारत में हर 100 में से 3 से 4 लोग साइलेंट करियर होते हैं, जिन्हें खुद पता नहीं होता कि वे इस बीमारी के वाहक हैं। अगर पति और पत्नी दोनों करियर हैं, तो हर प्रेग्नेंसी में 25% चांस होता है कि बच्चे को थालेसीमिया मेजर हो जाए। डॉ. विंकी रुघवानी ने बताया कि भारत में हर साल 10,000 से 15,000 बच्चे इस बीमारी के साथ पैदा होते हैं। इसलिए शादी से पहले और प्रेग्नेंसी के पहले ट्राइमेस्टर में HPLC टेस्ट कराना सबसे सही रहता है।
महाराष्ट्र सरकार की क्या योजनाएं हैं और कहां मिलेगी मदद?
महाराष्ट्र सरकार ‘Thalassemia-Free India’ अभियान के तहत मुफ्त जेनेटिक टेस्टिंग और HLA टाइपिंग कैंप लगा रही है। राज्य में अब तक 13,000 से ज्यादा मरीज हैं, जिनमें सबसे ज्यादा 3,420 मामले अकेले मुंबई में मिले हैं। सरकार बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए 9.5 लाख से 17 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद दे रही है। इसके अलावा, नागपुर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में मुफ्त CVS जेनेटिक टेस्टिंग की सुविधा भी उपलब्ध है।
जांच और इलाज के लिए किन अस्पतालों का विकल्प है?
मरीजों की मदद के लिए कई बड़े अस्पताल और संस्थाएं जुड़ी हैं। बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए कोकिलाबेन धीरुभाई अंबानी अस्पताल और इलाज के लिए डीनानाथ मंगेशकर अस्पताल जैसे विकल्प मौजूद हैं। इसके अलावा, मदरहुड हॉस्पिटल खारघर के डॉ. सुरभि सिद्धार्थ और डॉ. रीता मोदी ने बताया कि प्री-कंसीप्शन काउंसलिंग और साधारण ब्लड टेस्ट के जरिए जोखिमों को समय रहते पहचाना जा सकता है, जो कि काफी किफायती भी है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
थालेसीमिया स्क्रीनिंग के लिए कौन सा टेस्ट सबसे अच्छा है?
एक्सपर्ट्स और FOGSI-ICOG के अनुसार HPLC टेस्ट को पहली पसंद माना गया है। इसके अलावा हीमोग्लोबिन इलेक्ट्रोफोरेसिस टेस्ट के जरिए भी करियर की पहचान की जा सकती है।
क्या महाराष्ट्र सरकार इलाज में कोई आर्थिक मदद दे रही है?
हां, महाराष्ट्र सरकार बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए 9.5 लाख रुपये से लेकर 17 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।