Mumbai: Dharavi के पुनर्विकास के लिए ‘डिजिटल ट्विन’ तकनीक का इस्तेमाल, अब ऐसे तय होगी किसे मिलेगा घर
Maharashtra: मुंबई के धारावी इलाके का चेहरा बदलने की तैयारी शुरू हो गई है। अगले 10 सालों में इस घनी बस्ती की जगह ऊंची इमारतें लेंगी। इस पूरे प्रोजेक्ट में पारदर्शिता लाने और यह तय करने के लिए कि किसे घर मिलेगा और किसे नह
Maharashtra: मुंबई के धारावी इलाके का चेहरा बदलने की तैयारी शुरू हो गई है। अगले 10 सालों में इस घनी बस्ती की जगह ऊंची इमारतें लेंगी। इस पूरे प्रोजेक्ट में पारदर्शिता लाने और यह तय करने के लिए कि किसे घर मिलेगा और किसे नहीं, ‘डिजिटल ट्विन’ नाम की आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
Adani Realty Group द्वारा चलाए जा रहे इस प्रोजेक्ट में डिजिटल ट्विन का इस्तेमाल निवासी सत्यापन (resident verification) के लिए हो रहा है। यह तकनीक असल में धारावी का एक डिजिटल नक्शा या हूबहू कॉपी है, जिससे हर घर और उसकी बनावट का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है। Slum Rehabilitation Authority (SRA) इस डेटा का उपयोग Annexure 2 लिस्ट को फाइनल करने के लिए कर रही है, जिससे यह तय होगा कि कौन से निवासी पुनर्वास के लिए पात्र हैं।
इस डिजिटल मैपिंग के लिए Genesys International कंपनी को 22 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट मिला था। इसके लिए ड्रोन, LiDAR तकनीक और पोर्टेबल बैकपैक स्कैनर्स का इस्तेमाल किया गया ताकि पतली गलियों का भी सटीक डेटा मिल सके। सर्वे टीम ने मोबाइल ऐप के जरिए घर-घर जाकर दस्तावेज और जानकारी जुटाई है, जिससे विवादों को कम करने और फैसले लेने में तेजी आएगी।
पुनर्वास के नियम काफी स्पष्ट रखे गए हैं। जो लोग ग्राउंड फ्लोर पर रहते हैं और पात्र पाए जाएंगे, उन्हें 350 वर्ग फुट के मुफ्त फ्लैट मिलेंगे। वहीं, जो लोग 1 जनवरी 2011 से 15 नवंबर 2022 के बीच धारावी आए या जो ऊपरी मंजिल (mezzanine/top floors) पर रहते हैं, उन्हें ‘अपात्र’ माना गया है। महाराष्ट्र सरकार ने ऐसे लोगों के लिए मलाड में 118 एकड़ जमीन आवंटित की है, जहां उन्हें हायर-परचेज एग्रीमेंट के तहत घर दिए जाएंगे।
इस प्रोजेक्ट में Adani Group की 80% हिस्सेदारी है और इसे Navbharat Mega Developers Pvt Ltd (NMDPL) नाम की कंपनी लागू कर रही है। रेलवे की 6.5 एकड़ जमीन पर निर्माण कार्य 2025 में ही शुरू हो चुका है। इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल असली और पात्र निवासियों को ही योजना का लाभ मिले और किसी भी तरह की धोखाधड़ी न हो।