Maharashtra: मुंबई के Darukhana इलाके में मुंबई पोर्ट अथॉरिटी (MbPA) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 100 घरों को जमींदोज कर दिया है। यह कार्रवाई 12 मई 2026 को की गई, जिसे प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने का हिस्सा बताया है। इस क
Maharashtra: मुंबई के Darukhana इलाके में मुंबई पोर्ट अथॉरिटी (MbPA) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 100 घरों को जमींदोज कर दिया है। यह कार्रवाई 12 मई 2026 को की गई, जिसे प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने का हिस्सा बताया है। इस कार्रवाई के बाद कई परिवार बेघर हो गए हैं और अब वे किराए के मकान तलाश रहे हैं।
कार्रवाई कैसे हुई और क्या था पूरा मामला?
MbPA ने 15 अप्रैल 2026 को 120 घरों को नोटिस दिया था, जिसमें इन ढांचों को अवैध और सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया था। निवासियों को जगह खाली करने के लिए सात दिन का समय दिया गया था। 28 अप्रैल को जब पहली बार बुलडोजर चला, तब करीब 400 लोगों ने मानव दीवार बनाकर इसका विरोध किया था, जिससे प्रशासन को 10 दिन की मोहलत देनी पड़ी थी। आखिरकार 12 मई को भारी पुलिस बल के साथ दोबारा कार्रवाई की गई और 100 घर गिरा दिए गए।
क्या प्रभावित लोगों को कोई मदद या घर मिलेगा?
MbPA अधिकारियों का कहना है कि यह जमीन केंद्र सरकार की है, इसलिए यहां रहने वाले लोग पुनर्वास (Rehabilitation) के हकदार नहीं हैं। अथॉरिटी ने साफ कर दिया है कि उनके पास इन लोगों को कहीं और बसाने की कोई हाउसिंग पॉलिसी नहीं है। स्थानीय निवासियों का दावा है कि वे 1995 या उससे पहले से यहां रह रहे हैं। इस बीच, सांसद अरविंद सावंत, मिलिंद देओरा और विधायक मंगल प्रभात लोढ़ा ने MbPA को पत्र लिखकर मानवीय आधार पर पुनर्वास की मांग की थी।
अब आगे क्या होगा?
MbPA ने स्पष्ट किया है कि इलाके में अन्य कथित अतिक्रमणों के खिलाफ यह अभियान जारी रहेगा। प्रभावित लोग कोर्ट से स्टे ऑर्डर लेने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनकी अपील 11 मई को रजिस्टर हुई, जो समय पर नहीं मिल सकी। इस वजह से अब कई परिवार मुश्किल में हैं और आस-पास के स्लम इलाकों में किराए के मकानों के दाम अचानक बढ़ गए हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Darukhana में कितने घर गिराए गए और क्यों?
12 मई 2026 को MbPA ने करीब 100 घरों को गिराया। प्रशासन का कहना है कि ये घर केंद्र सरकार की जमीन पर अवैध अतिक्रमण थे और सुरक्षा के लिए खतरा थे।
क्या इन लोगों को सरकार कहीं और बसाएगी?
नहीं, MbPA अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनके पास पुनर्वास की कोई पॉलिसी नहीं है और ये लोग पुनर्वास आवास के लिए पात्र नहीं हैं।