Mumbai में फर्जी सिम कार्ड बेचने वाले POS ऑपरेटर पर FIR, साइबर ठगों को सप्लाई किए जा रहे थे Ghost SIM
Maharashtra: मुंबई की वेस्ट साइबर पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए सिम कार्ड एक्टिवेट कर उन्हें साइबर ठगों को बेचने वाले एक POS ऑपरेटर के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस ने इस खेल में प्रथमेष चोरत नाम के व्यक्ति को पकड़
Maharashtra: मुंबई की वेस्ट साइबर पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए सिम कार्ड एक्टिवेट कर उन्हें साइबर ठगों को बेचने वाले एक POS ऑपरेटर के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस ने इस खेल में प्रथमेष चोरत नाम के व्यक्ति को पकड़ा है, जो लोगों के फर्जी कागजात का इस्तेमाल कर ‘म्यूल सिम’ या ‘घोस्ट सिम’ तैयार करता था। इन सिम कार्ड्स का इस्तेमाल ऑनलाइन धोखाधड़ी और लोगों के बैंक खातों से पैसे उड़ाने के लिए किया जाता था।
पुलिस जांच में सामने आया कि साइबर अपराधी भारत के टेलीकॉम POS सिस्टम की कमियों का फायदा उठाते हैं। कुछ भ्रष्ट रिटेल एजेंट फर्जी पहचान पत्रों के जरिए सिम एक्टिवेट करते हैं, जिससे बायोमेट्रिक सुरक्षा को आसानी से चकमा दिया जा सकता है। इन सिम कार्ड्स की मदद से ठग ऐसे बैंक खाते खोलते हैं जिनका पता लगाना मुश्किल होता है। इस मामले की शिकायत वेस्ट रीजन साइबर पुलिस के कांस्टेबल वी.एस. दिघे ने दर्ज कराई थी।
यह कार्रवाई केवल एक इलाके तक सीमित नहीं है। 25 जुलाई 2026 तक साउथ साइबर पुलिस ने भी कई सिम कार्ड रिटेलर्स और ग्राहकों के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस को पता चला है कि मोहल्ले की छोटी मोबाइल दुकानों पर केवाईसी (KYC) के अधूरे या फर्जी कागजात लेकर सिम चालू किए जा रहे थे और फिर उन्हें ठगों को बेचा जा रहा था। यह पूरा नेटवर्क गृह मंत्रालय के नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल और समन्वय पोर्टल पर आई शिकायतों के विश्लेषण के बाद खुला है।
फिलहाल पुलिस संदिग्ध रिटेलर्स के बैंक खातों, पैसों के लेनदेन और कॉल रिकॉर्ड्स की जांच कर रही है ताकि इस पूरे गिरोह के नेटवर्क का पता लगाया जा सके। सरकार ने डिजिटल सुरक्षा बढ़ाने के लिए 2026 में कॉलर नेम प्रेजेंटेशन (CNAP) और सिम-बाइंडिंग जैसे नए नियम लागू किए हैं। दूरसंचार विभाग (DoT) ने मैसेजिंग ऐप्स के लिए सिम-बाइंडिंग की समय सीमा 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दी है। इस नियम के बाद अकाउंट चलाने के लिए सिम कार्ड का उसी डिवाइस में होना जरूरी होगा, जिससे अपराधी दूर बैठकर फर्जी सिम से धोखाधड़ी नहीं कर पाएंगे। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि बिना पूरी जांच-परख के सिम एक्टिवेशन के लिए अपने पहचान पत्र किसी को न दें।