Mumbai में बच्चों से जुड़े अश्लील कंटेंट को फैलाने वालों पर पुलिस की कार्रवाई, सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ केस दर्ज
Maharashtra: मुंबई की ईस्ट रीजन साइबर पुलिस ने सोशल मीडिया पर बच्चों से जुड़े अश्लील कंटेंट (CSAM) को शेयर करने और पब्लिश करने के मामले में अज्ञात मोबाइल यूजर्स के खिलाफ केस दर्ज किया है। यह कार्रवाई 23 जुलाई 2026 को की
Maharashtra: मुंबई की ईस्ट रीजन साइबर पुलिस ने सोशल मीडिया पर बच्चों से जुड़े अश्लील कंटेंट (CSAM) को शेयर करने और पब्लिश करने के मामले में अज्ञात मोबाइल यूजर्स के खिलाफ केस दर्ज किया है। यह कार्रवाई 23 जुलाई 2026 को की गई। पुलिस को स्टेट टिप-लाइन से अलर्ट मिला था, जिसके बाद फॉरेंसिक जांच के जरिए इस मामले का पता चला।
केंद्र सरकार ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है। 22 जुलाई 2026 को भारत सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री के विज्ञापनों के प्रसार पर संज्ञान लिया और संबंधित कंपनियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने लोक सभा में बताया कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करने और सोशल मीडिया पर इस तरह के कंटेंट के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
कानूनी नियमों के मुताबिक, IT एक्ट 2000 और 2021 के इंटरमीडियरी गाइडलाइन्स के तहत सोशल मीडिया कंपनियों की यह जिम्मेदारी है कि वे बच्चों के लिए हानिकारक कंटेंट की शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर उसे हटा दें। IT एक्ट की धारा 67, 67A और 67B के तहत अश्लील या यौन सामग्री पब्लिश करने पर कड़ी सजा का प्रावधान है। सुप्रीम कोर्ट ने भी निर्देश दिया है कि ऐसी सामग्री को तुरंत हटाकर पुलिस को रिपोर्ट किया जाए, वरना कंपनियां अपनी कानूनी छूट खो देंगी।
हाल ही में 25 जून 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने भी एक अहम फैसला सुनाया था। कोर्ट ने Meta के उस फैसले को सही ठहराया जिसमें एक नाबालिग को अश्लील कंटेंट भेजने वाले व्यक्ति का Instagram अकाउंट हमेशा के लिए बंद कर दिया गया था। कोर्ट ने साफ किया कि बच्चों के शोषण को रोकने में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की बड़ी जिम्मेदारी है।