Maharashtra: मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय (CSMVS) में ‘Roots of a City: The Pathare Prabhus of Mumbai’ नाम से एक नई प्रदर्शनी शुरू हुई है। यह प्रदर्शनी 19 मई 2026 से आम लोगों के लिए खुली है
Maharashtra: मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय (CSMVS) में ‘Roots of a City: The Pathare Prabhus of Mumbai’ नाम से एक नई प्रदर्शनी शुरू हुई है। यह प्रदर्शनी 19 मई 2026 से आम लोगों के लिए खुली है। इसमें मुंबई के सबसे पुराने समुदायों में से एक, पठारे प्रभुओं के जीवन और उनकी विरासत को दिखाया गया है।
प्रदर्शनी में क्या खास देखने को मिलेगा
इस प्रदर्शनी को तैयार करने के लिए परिवारों के पुराने एल्बम, पुश्तैनी गहने, कपड़े और पुरानी तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है। क्यूरेटर वंदना प्रपन्ना ने बताया कि इस काम में करीब तीन महीने लगे और करीब 35 लोगों के इंटरव्यू लिए गए। इसका मकसद लोगों को यह बताना है कि पठारे प्रभु समुदाय के लोग कैसे रहते थे और उनके घर और मंदिर कैसे थे। इसमें आधिकारिक रिकॉर्ड के बजाय लोगों की यादों और घरेलू चीजों पर ज्यादा ध्यान दिया गया है।
समुदाय का इतिहास और उनकी पहचान
CSMVS के ट्रस्टी और सह-क्यूरेटर राजन जयकर ने बताया कि यह समुदाय करीब साल 1296 में देवगिरी से मुंबई आया था और माहिम द्वीप पर बसा था। उन्होंने यह भी बताया कि पुर्तगाली शासन के दौरान इस समुदाय के लोग क्लर्क, इंटरप्रेटर और ट्रांसलेटर के तौर पर काम करते थे। इस समुदाय में महिलाओं को बराबर का दर्जा दिया गया है। डॉ. अनीता राणे-कोठारे के मुताबिक, यह समुदाय अपनी पहचान को बचाने के लिए हमेशा जागरूक रहा है और उनकी साड़ियां और पुरानी वस्तुएं आज भी एक जीवित विरासत हैं।
इन लोगों ने दिया प्रदर्शनी में योगदान
इस प्रदर्शनी को सफल बनाने में कई परिवारों ने अपनी निजी चीजें साझा की हैं। इनमें मुख्य रूप से ये नाम शामिल हैं:
- डॉ. अनीता राणे-कोठारे
- विश्वास अजिंक्या
- साक्षी और उदय ज़ाओबा
- नीला त्रिलोककर
- रश्मिन राणे
- बागेश्री पारिख
Frequently Asked Questions (FAQs)
Roots of a City प्रदर्शनी कब से शुरू हुई है और कहाँ लगी है?
यह प्रदर्शनी 19 मई 2026 से मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय (CSMVS) में शुरू हुई है।
पठारे प्रभु समुदाय का मुंबई से क्या संबंध है?
राजन जयकर के अनुसार, यह समुदाय लगभग 1296 में देवगिरी से मुंबई आया था और यहाँ के माहिम द्वीप पर आकर बसा था।