Mumbai में धोखाधड़ी मामला: कोर्ट ने EOW को दिया नई FIR दर्ज करने का आदेश, पुलिस ने सिविल विवाद बताकर केस बंद किया था
Maharashtra: मुंबई पुलिस के लिए एक बड़ा झटका सामने आया है। कोर्ट ने आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को आदेश दिया है कि वह धोखाधड़ी की एक शिकायत पर फिर से FIR दर्ज करे। पुलिस ने इस मामले को केवल एक सिविल विवाद बताकर बंद कर दिया थ
Maharashtra: मुंबई पुलिस के लिए एक बड़ा झटका सामने आया है। कोर्ट ने आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को आदेश दिया है कि वह धोखाधड़ी की एक शिकायत पर फिर से FIR दर्ज करे। पुलिस ने इस मामले को केवल एक सिविल विवाद बताकर बंद कर दिया था, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया।
यह पूरा मामला बिजनेसमैन Mahesh Doshi से जुड़ा है। उन्होंने कोर्ट में पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ आवेदन दिया था। कोर्ट के जज Vikram Jagdale ने पाया कि यह मामला MPID एक्ट की धाराओं के तहत आता है और इसमें धोखाधड़ी के सबूत दिख रहे हैं।
मामले की पूरी जानकारी नीचे दी गई तालिका में है:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| निवेश की तारीख | मार्च 2021 |
| कुल निवेश राशि | लगभग 7.65 करोड़ रुपये |
| वादा किया गया रिटर्न | 18% सालाना ब्याज |
| बकाया राशि (जनवरी 2025 तक) | 8.47 करोड़ रुपये (मूलधन और ब्याज समेत) |
| आरोपी कंपनी | Ranbir Real Estate and Developers LLP |
| मुख्य आरोपी | Jaikumar Gajanand Gupta, Suyash Jaikumar Gupta और Chirag Shah |
Mahesh Doshi और उनके परिवार ने जोगेश्वरी ईस्ट में एक प्रॉपर्टी रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए यह पैसा निवेश किया था। जून 2024 से आरोपियों ने ब्याज और मूलधन का भुगतान करना बंद कर दिया। पुलिस का तर्क था कि यह एक कॉन्ट्रैक्ट का मामला है और सिविल कोर्ट जाना चाहिए, लेकिन कोर्ट ने साफ किया कि यह MPID एक्ट के तहत ‘डिपॉजिट’ का मामला है।
कोर्ट ने MPID एक्ट की धारा 3 और 4 के तहत केस चलाने का निर्देश दिया है। धारा 3 में वित्तीय संस्थानों द्वारा धोखाधड़ी करने पर 6 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है, जबकि धारा 4 संपत्तियों को जब्त करने से संबंधित है।