Maharashtra: मुंबई की एक अदालत ने सिम कार्ड के जरिए अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी करने वाले एक एजेंट मोहम्मद सुल्तान की जमानत याचिका खारिज कर दी है। सुल्तान एक टेलीकॉम कंपनी में POS एजेंट था, जिसने फर्जी तरीके से 100 से ज
Maharashtra: मुंबई की एक अदालत ने सिम कार्ड के जरिए अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी करने वाले एक एजेंट मोहम्मद सुल्तान की जमानत याचिका खारिज कर दी है। सुल्तान एक टेलीकॉम कंपनी में POS एजेंट था, जिसने फर्जी तरीके से 100 से ज्यादा सिम कार्ड एक्टिवेट किए थे। इन सिम कार्ड्स का इस्तेमाल केरल और दक्षिण-पूर्वी एशिया के देशों में लोगों को ठगने के लिए किया जा रहा था।
कैसे हुआ फर्जी सिम कार्ड का खेल
पुलिस जांच में सामने आया कि मोहम्मद सुल्तान ग्राहकों की एक रिक्वेस्ट पर दो सिम कार्ड एक्टिवेट करता था। इनमें से एक सिम ग्राहक को दे दिया जाता था और दूसरा बिना बताए अपने पास रख लिया जाता था। सुल्तान ने ये फर्जी सिम कार्ड ज़ीशान निसार कामले नाम के व्यक्ति को 500 रुपये प्रति सिम के हिसाब से बेचे थे। इस पूरे खेल में सुल्तान को करीब 90,000 रुपये मिले थे।
UP और Bihar के लोग हुए शिकार
इस धोखाधड़ी में सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों पर पड़ा है। आरोपियों ने इन राज्यों के लोगों के आधार कार्ड की डिटेल्स का गलत इस्तेमाल करके सिम एक्टिवेट किए थे। इन सिम कार्ड्स को थाईलैंड, म्यांमार और लाओस जैसे देशों में रोमिंग नेटवर्क के जरिए साइबर फ्रॉड करने के लिए भेजा गया था। पीड़ितों ने इसकी शिकायत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) पर की थी।
कोर्ट ने जमानत क्यों नहीं दी
अडिशनल सेशन जज बी वाई फड़ ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि जांच अभी बहुत जरूरी मोड़ पर है। कोर्ट ने माना कि यह एक संगठित अपराध है जिससे आम जनता की आर्थिक सुरक्षा को खतरा है। पुलिस अभी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन सिम कार्ड्स के जरिए और कौन-कौन से अपराध किए गए और इस गिरोह में और कौन शामिल है। फिलहाल 50 अन्य POS एजेंटों की भी जांच चल रही है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मोहम्मद सुल्तान ने फर्जी सिम कैसे एक्टिवेट किए?
सुल्तान एक टेलीकॉम POS एजेंट था। वह ग्राहकों के आधार कार्ड का इस्तेमाल कर एक के बजाय दो सिम एक्टिवेट करता था और दूसरे सिम को ₹500 में बेच देता था।
इन सिम कार्ड्स का इस्तेमाल कहां किया गया?
इन सिम कार्ड्स को केरल और दक्षिण-पूर्वी एशिया के देशों जैसे थाईलैंड, म्यांमार और लाओस में साइबर धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल किया गया था।