Maharashtra: मुंबई के कोलाबा इलाके में इन दिनों एक खास प्रदर्शनी लगी है, जो अफ्रीका की आजादी की कहानी बयां कर रही है। यहाँ एक ऐसे व्यक्ति की यादें ताजा की गई हैं, जिसने मुंबई में रहकर शिक्षा ली और बाद में अफ्रीका में उपन
Maharashtra: मुंबई के कोलाबा इलाके में इन दिनों एक खास प्रदर्शनी लगी है, जो अफ्रीका की आजादी की कहानी बयां कर रही है। यहाँ एक ऐसे व्यक्ति की यादें ताजा की गई हैं, जिसने मुंबई में रहकर शिक्षा ली और बाद में अफ्रीका में उपनिवेशवाद के खिलाफ आवाज उठाई। यह प्रदर्शनी दिखाती है कि कैसे मुंबई का माहौल और यहाँ की पढ़ाई ने एक विदेशी क्रांतिकारी को आकार दिया।
कौन थे Ahmad Rashad Ali और मुंबई से क्या रिश्ता था
Ahmad Rashad Ali का जन्म 1917 में Zanzibar में हुआ था। वह 1938 में पढ़ाई के लिए मुंबई आए और 1947 तक यहीं रहे। उन्होंने मुंबई के मशहूर Anjuman-I-Islam संस्थान से शिक्षा ली। मुंबई में रहने के दौरान वह एक प्रोफेशनल फुटबॉल खिलाड़ी भी रहे और यहाँ के स्वतंत्रता आंदोलन को करीब से देखा। Muhammad Ali Jinnah की मुस्लिम लीग के जरिए वह राजनीतिक रूप से जागरूक हुए, जिसका असर बाद में उनके क्रांतिकारी कामों में दिखा।
कैसे बनीं वह अफ्रीका की ‘क्रांतिकारी रेडियो आवाज’
मुंबई से मिले राजनीतिक सबक को Ahmad Rashad Ali ने Radio Cairo के जरिए अफ्रीका तक पहुँचाया। उन्होंने ‘Sauti Ya Uhuru Ya Afrika’ (अफ्रीकी स्वतंत्रता की आवाज) नाम से एक गुप्त रेडियो प्रोग्राम चलाया, जो स्वाहिली भाषा में था। 1950 और 60 के दशक में इस रेडियो के जरिए पूरे पूर्वी अफ्रीका में आजादी के संदेश भेजे गए। ब्रिटिश अधिकारी उनकी आवाज को इतना खतरनाक मानते थे कि एक दशक तक हर रात उनकी निगरानी की जाती थी।
मुंबई में कहाँ और कब तक देख सकते हैं यह प्रदर्शनी
यह प्रदर्शनी कोलाबा के Strangers House में लगी है, जिसका नाम ‘Uhuru Ya Afrika – Africa’s Freedom’ है। इसे गैबोन-आइवरी कोस्ट के पेंटर Assogo Dyan Daniel और केन्याई शोधकर्ता Tony Omondi ने तैयार किया है। इसमें 14 अफ्रीकी राष्ट्रवादियों के चित्र हैं, जिन्हें पोरबंदर के खादी कपड़े पर बनाया गया है। यह प्रदर्शनी 7 जून तक देखी जा सकती है और इसे 25 मई के अफ्रीकी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लगाया गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Ahmad Rashad Ali ने मुंबई में कहाँ पढ़ाई की थी
Ahmad Rashad Ali ने मुंबई के ऐतिहासिक संस्थान Anjuman-I-Islam में पढ़ाई की थी, जहाँ वह 1938 से 1947 तक रहे।
कोलाबा की प्रदर्शनी कब तक चलेगी
कोलाबा के Strangers House में लगी ‘Uhuru Ya Afrika’ प्रदर्शनी 7 जून तक आम जनता के लिए खुली रहेगी।