Maharashtra: मुंबई में कोस्टल रोड प्रोजेक्ट के लिए मैंग्रोव के जंगलों को काटा जा रहा है, जिससे स्थानीय मछुआरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। वर्सोवा से भायंदर तक बनने वाली इस सड़क के कारण कई मछुआरा परिवारों
Maharashtra: मुंबई में कोस्टल रोड प्रोजेक्ट के लिए मैंग्रोव के जंगलों को काटा जा रहा है, जिससे स्थानीय मछुआरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। वर्सोवा से भायंदर तक बनने वाली इस सड़क के कारण कई मछुआरा परिवारों की कमाई घट गई है। पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इससे शहर में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है और समुद्री जीवों का ठिकाना छिन जाएगा।
मछुआरों पर क्या असर पड़ा और उनकी क्या मांग है?
चारकोप कोलीवाड़ा के करीब 50 मछली पकड़ने वाले परिवारों पर इस प्रोजेक्ट का सीधा असर पड़ा है। स्थानीय मछुआरे अनिल भंडारी और दीप्ति भंडारी का कहना है कि मैंग्रोव कटने से मछलियों के प्रजनन स्थल नष्ट हो रहे हैं, जिससे उनकी पकड़ कम हो गई है। मछुआरों की मुख्य मांग है कि कोस्टल रोड के इंटरचेंज को इस तरह डिजाइन किया जाए ताकि उनकी नावें आसानी से निकल सकें। उनका कहना है कि सिर्फ पैसे देने से उनकी पीढ़ियों पुरानी रोजी-रोटी वापस नहीं आएगी।
मुआवजे और पर्यावरण को लेकर क्या है सरकारी स्थिति?
BMC ने प्रभावित मछुआरों के लिए मुआवजे की घोषणा की है, लेकिन समुदाय का दावा है कि इस बारे में उनसे कोई सलाह नहीं ली गई। मुआवजे से जुड़ी मुख्य जानकारियां नीचे दी गई हैं:
| विवरण |
जानकारी |
| कुल आवंटित राशि |
₹136 करोड़ |
| लाभार्थी मछुआरे |
1,343 लोग |
| व्यक्तिगत मुआवजा |
₹6 लाख तक |
| काटे जाने वाले मैंग्रोव |
लगभग 45,000 पेड़ |
| नये पौधे लगाने का वादा |
1.3 लाख पौधे |
कोर्ट और विशेषज्ञों ने क्या कहा?
पूर्व सुप्रीम कोर्ट जस्टिस अभय ओका ने 45,000 मैंग्रोव काटने के फैसले को बहुत बड़ा नुकसान बताया है। उन्होंने कहा कि नए पौधे उसी इलाके में लगाए जाने चाहिए जहां से पुराने पेड़ कटे हैं। वहीं, TISS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ली कोलीवाड़ा और लोटस जेटी के मछुआरों की कमाई में 50% तक की गिरावट आई है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का मानना है कि बुनियादी ढांचे के चक्कर में प्रकृति को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे मुंबई की बाढ़ से लड़ने की क्षमता कम हो जाएगी।