Maharashtra: मुंबई के वर्सोवा से भायंदर तक बनने वाले कोस्टल रोड प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के शहरी विकास विभाग (UDD) ने इस प्रोजेक्ट के रास्ते में आने वाली निजी और आरक्षित जमीनों के लिए बढ़ा हु
Maharashtra: मुंबई के वर्सोवा से भायंदर तक बनने वाले कोस्टल रोड प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के शहरी विकास विभाग (UDD) ने इस प्रोजेक्ट के रास्ते में आने वाली निजी और आरक्षित जमीनों के लिए बढ़ा हुआ TDR (Transferable Development Rights) देने का फैसला किया है। BMC को इस काम के लिए करीब 40 हेक्टेयर से ज्यादा निजी जमीन की जरूरत है, जिसके लिए अब जमीन मालिकों को ज्यादा फायदा मिलेगा।
TDR में क्या बदलाव किए गए हैं और इसका क्या फायदा होगा?
पहले CRZ, No Development Zones (NDZ) और Special Development Zones (SDZ) जैसे इलाकों के लिए मिलने वाला TDR, सामान्य इलाकों के मुकाबले 50% कम होता था। अब सरकार ने इसे बढ़ा दिया है। BMC ने दिसंबर 2025 में विभाग को बताया था कि कम TDR मिलने की वजह से जमीन मालिक अपनी जमीन देने को तैयार नहीं थे। अब इस नई छूट के बाद उम्मीद है कि लोग अपनी जमीन आसानी से दे देंगे और प्रोजेक्ट का काम तेजी से आगे बढ़ेगा।
जमीन अधिग्रहण के लिए TDR का रास्ता क्यों चुना गया?
BMC और सरकार का मानना है कि नकद मुआवजे (Cash Compensation) के मामले बहुत लंबे समय तक कोर्ट में चलते हैं, जिससे खर्च बढ़ जाता है और समय की बर्बादी होती है। TDR के जरिए जमीन लेना ज्यादा तेज तरीका है। शहरी विकास विभाग ने 10 अप्रैल को जारी नोटिफिकेशन में साफ किया कि यह प्रक्रिया ‘राइट टू फेयर कंपनसेशन एक्ट’ के मुकाबले ज्यादा आसान और तेज होगी।
Versova-Bhayander कोस्टल रोड प्रोजेक्ट की मुख्य बातें
| विवरण |
जानकारी |
| कुल लंबाई |
23 किलोमीटर |
| अनुमानित लागत |
18,000 से 20,000 करोड़ रुपये |
| लक्ष्य वर्ष |
2028 तक पूरा करने का लक्ष्य |
| कुल निजी जमीन की जरूरत |
40 हेक्टेयर से अधिक |
| कोर्ट का आदेश |
दिसंबर 2025 में मंजूरी, मैंग्रोव के लिए सालाना अपडेट देना होगा |