Maharashtra: मुंबई में Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) ने एक प्रॉपर्टी को बहुत जल्दबाजी में गिरा दिया, जिस पर Bombay High Court ने कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस मिलिंद एन. जाधव ने कहा कि बीएमसी ने बहुत ही मनमाने
Maharashtra: मुंबई में Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) ने एक प्रॉपर्टी को बहुत जल्दबाजी में गिरा दिया, जिस पर Bombay High Court ने कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस मिलिंद एन. जाधव ने कहा कि बीएमसी ने बहुत ही मनमाने तरीके से काम किया है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर बीएमसी अपनी कार्रवाई को सही साबित नहीं कर पाई, तो उसे अपने खर्चे पर उस मकान को दोबारा बनवाना होगा।
BMC ने नियमों को कैसे तोड़ा?
कोर्ट ने पाया कि बीएमसी ने अपने ही नियमों की अनदेखी की। 24 अप्रैल 2025 के सर्कुलर के मुताबिक, किसी भी निर्माण को गिराने से पहले 15 दिन का नोटिस देना या मालिक की बात सुनना जरूरी था। लेकिन इस मामले में 23 जनवरी 2026 को नोटिस दिया गया और 6 फरवरी 2026 तक मकान गिरा दिया गया। पूरी प्रक्रिया सिर्फ 13 दिनों में पूरी कर ली गई और मालिक अशोक कुले को अपनी बात रखने का मौका भी नहीं मिला।
कोर्ट ने क्या कड़े निर्देश दिए हैं?
जस्टिस जाधव ने कहा कि बीएमसी कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकती और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को नजरअंदाज नहीं कर सकती। कोर्ट ने डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर से एक व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। इसमें बीएमसी को यह बताना होगा कि आखिर किन कारणों से अधिकारियों ने तय समय सीमा और नियमों को ताक पर रखकर इतनी जल्दबाजी में तोड़फोड़ की।
अधिकारियों पर क्या होगी कार्रवाई?
हाई कोर्ट ने साफ किया है कि बीएमसी इस अदालत के प्रति जवाबदेह है। अगर बीएमसी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाती है, तो कोर्ट न केवल मकान के पुनर्निर्माण का आदेश देगा, बल्कि इस लापरवाही में शामिल अधिकारियों पर जुर्माना भी लगा सकता है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 जून को होगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बीएमसी ने नोटिस से लेकर तोड़फोड़ तक कितना समय लिया?
बीएमसी ने 23 जनवरी 2026 को नोटिस जारी किया और 6 फरवरी 2026 को मकान गिरा दिया। यह पूरी कार्रवाई मात्र 13 दिनों के भीतर पूरी की गई।
हाई कोर्ट ने बीएमसी को क्या चेतावनी दी है?
कोर्ट ने कहा है कि अगर बीएमसी अपनी जल्दबाजी और नियमों के उल्लंघन का सही कारण नहीं बता पाई, तो उसे अपने खर्च पर मकान दोबारा बनवाना होगा और जिम्मेदार अधिकारियों पर जुर्माना लगेगा।