Mumbai: BMC के 1,523 कर्मचारियों पर विभागीय जांच जारी, RTI से खुला बड़ा खुलासा

Maharashtra: मुंबई नगर निगम (BMC) के कामकाज और लापरवाही को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। RTI से मिली जानकारी के मुताबिक, BMC के 1,523 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ 537 विभागीय जांच चल रही हैं। यह डेटा 30 अप्रैल 2026 त

Maharashtra: मुंबई नगर निगम (BMC) के कामकाज और लापरवाही को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। RTI से मिली जानकारी के मुताबिक, BMC के 1,523 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ 537 विभागीय जांच चल रही हैं। यह डेटा 30 अप्रैल 2026 तक का है, जिससे पता चलता है कि निगम के अंदर अनुशासन और जवाबदेही को लेकर कितनी बड़ी स्थिति बनी हुई है।

हाल ही में मुंबई में बारिश के दौरान हुए दो बड़े हादसों के बाद प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। साकी नाका और चांदिवली इलाके में एक खुला मैनहोल होने की वजह से 55 साल के असलम इसाक शेख की मौत हो गई। इस घटना के बाद BMC कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने ‘L’ वार्ड के असिस्टेंट कमिश्नर धनजी हर्लेकर समेत चार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया। साथ ही एक हाई लेवल कमेटी बनाई गई है जो सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी। महाराष्ट्र सरकार ने भी पूरे शहर के मैनहोल की जांच आठ दिनों में पूरी करने का आदेश दिया है।

इसी तरह, चेंबूर में एक स्कूल बस पर पेड़ गिरने से 11 साल के बच्चे विहान श्रीवास्तव की जान चली गई। इस हादसे के बाद गार्डन सुपरिटेंडेंट जगदीश भोइर और दो अन्य अधिकारियों को सस्पेंड किया गया। इन घटनाओं ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

RTI एक्टिविस्ट जितेंद्र घड़गे ने बताया कि इनमें से कई जांचें सालों से अटकी हुई हैं। उनके मुताबिक, अक्सर जूनियर स्टाफ पर कार्रवाई होती है लेकिन बड़े अधिकारियों तक बात नहीं पहुँचती। कई कर्मचारी तो जांच पूरी होने से पहले ही रिटायर हो जाते हैं और अंत में उन्हें मामूली सजा मिलती है या क्लीन चिट दे दी जाती है।

विवरण आंकड़े/जानकारी
कुल लंबित जांचें 537 (1,523 कर्मचारी)
6 महीने से ज्यादा पुरानी जांचें 257
सस्पेंड कर्मचारी 234 (150 क्रिमिनल केस, 84 रिश्वत/ACB)
Enquiry Office में लंबित केस 189
निष्क्रिय (Dormant) केस 103
अप्रैल 2026 में पूरी हुई जांचें 15

बीएमसी अधिकारियों का कहना है कि ये जांचें ‘लंबित’ नहीं बल्कि ‘जारी’ हैं क्योंकि नियमों के मुताबिक कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका देना होता है। नियमों के अनुसार, सस्पेंड कर्मचारी को पिछले वेतन का 50% मिलता है, जो तीन महीने बाद 75% तक बढ़ सकता है।