Mumbai में BMC की QR कोड ड्राइव से बड़ा खुलासा, 3,167 ‘घोस्ट’ हॉकर लाइसेंस मिले
Maharashtra: मुंबई नगर निगम (BMC) ने शहर के स्ट्रीट वेंडर्स के लिए शुरू की गई QR कोड पहचान पत्र मुहिम के दौरान एक बड़ा खुलासा किया है। इस वेरिफिकेशन ड्राइव में पता चला है कि 2014 के सर्वे में कानूनी माने गए 3,167 हॉकर अब
Maharashtra: मुंबई नगर निगम (BMC) ने शहर के स्ट्रीट वेंडर्स के लिए शुरू की गई QR कोड पहचान पत्र मुहिम के दौरान एक बड़ा खुलासा किया है। इस वेरिफिकेशन ड्राइव में पता चला है कि 2014 के सर्वे में कानूनी माने गए 3,167 हॉकर अब इस दुनिया में नहीं रहे। इन मृत वेंडर्स के नाम पर लाइसेंस अभी भी चल रहे थे, जिन्हें अब ‘घोस्ट लाइसेंस’ कहा जा रहा है।
BMC ने मई 2026 से हॉकरों को QR कोड वाले आईडी कार्ड देना शुरू किया था। इस मुहिम का मकसद यह पता लगाना था कि कौन से वेंडर असली हैं और कौन से अवैध। अब तक करीब 48,000 QR कोड कार्ड बांटे जा चुके हैं। सबसे ज्यादा वेरिफिकेशन दादर, कोलाबा, चर्चगेट और गोरेगांव जैसे इलाकों में हुआ है।
इस स्थिति को देखते हुए BMC की लॉ कमेटी अब एक नई पॉलिसी बनाने पर विचार कर रही है। कमेटी की चेयरपर्सन दीक्षा करकर ने बताया कि अधिकारियों से मृत हॉकरों के लाइसेंस उनके परिवार के योग्य सदस्यों को ट्रांसफर करने के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने को कहा गया है। यह इसलिए जरूरी है क्योंकि कई वेंडर्स ने अपने बाद किसी नॉमिनी का नाम नहीं दिया था।
यह पूरी प्रक्रिया 2014 के स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट और शहर की लंबे समय से लंबित हॉकर पॉलिसी को लागू करने का हिस्सा है। हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने BMC से इस बात पर जवाब मांगा है कि ‘एक परिवार एक लाइसेंस’ के नियम के बावजूद कई परिवारों के सदस्यों को एक से ज्यादा लाइसेंस कैसे मिल गए।
आने वाले समय में BMC और मुंबई पुलिस मिलकर इन QR कोड कार्ड्स के जरिए असली और नकली वेंडर्स की पहचान करेंगे। वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद टाउन वेंडिंग कमेटी (TVC) तय करेगी कि कौन से हॉकर किस जगह पर अपनी दुकान लगा सकते हैं, ताकि सड़कों से अतिक्रमण कम हो सके।