Maharashtra: मुंबई में सार्वजनिक जगहों और कबूतरखानों में दाना खिलाने पर लगी रोक अब धीरे-धीरे खत्म होती दिख रही है। BMC ने इस अभियान में अपनी पकड़ ढीली कर दी है, जिससे जुर्माने की रकम में भारी गिरावट आई है। इस बीच दादर कब
Maharashtra: मुंबई में सार्वजनिक जगहों और कबूतरखानों में दाना खिलाने पर लगी रोक अब धीरे-धीरे खत्म होती दिख रही है। BMC ने इस अभियान में अपनी पकड़ ढीली कर दी है, जिससे जुर्माने की रकम में भारी गिरावट आई है। इस बीच दादर कबूतरखाना को लेकर एक बार फिर विवाद शुरू हो गया है, जिससे यह मामला दोबारा चर्चा में है।
BMC की सख्ती में कमी क्यों आई और क्या है मौजूदा स्थिति?
बीएमसी के रिकॉर्ड बताते हैं कि पिछले कुछ महीनों में कबूतरों को दाना खिलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई बहुत कम हो गई है। पहले जो भारी जुर्माना वसूला जा रहा था, वह अब काफी घट गया है। साथ ही, दाना खिलाने के लिए तय की गई जगहें अब खाली पड़ी हैं। कोर्ट के आदेश के बावजूद अभी तक बीट मार्शल की नियुक्ति नहीं की गई है, जिससे नियमों का पालन कराने वाला कोई नहीं है।
दादर कबूतरखाना विवाद और कोर्ट के आदेश क्या थे?
हाल ही में शिव सेना (UBT) विधायक महेश सावंत ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए दादर कबूतरखाना को गिराने की मांग की थी। इससे पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा था कि कबूतरों की बीट और पंख फेफड़ों की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। कोर्ट ने बीएमसी को निर्देश दिया था कि अवैध रूप से दाना खिलाने वालों पर FIR दर्ज की जाए और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने भी पब्लिक हेल्थ को प्राथमिकता देते हुए इस प्रतिबंध का समर्थन किया था।
जुर्माने और नियमों का पुराना रिकॉर्ड क्या रहा?
15 जुलाई 2025 को बीएमसी ने दाना खिलाने पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया था। उस समय शहर के 24 वार्डों से कुल 55,700 रुपये का जुर्माना वसूला गया था, जिसमें दादर कबूतरखाना सबसे ऊपर था। अगस्त 2025 में हाई कोर्ट ने एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई थी ताकि स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर की जांच हो सके। बीएमसी ने यह भी विचार किया था कि दादर में सुबह 6 से 8 बजे तक दाना खिलाने की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन इस पर जनता की राय मांगी गई थी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मुंबई में कबूतरों को दाना खिलाने पर कितना जुर्माना था?
15 जुलाई 2025 को बीएमसी ने राज्य सरकार के निर्देशों के बाद दाना खिलाने पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया था।
कबूतरखानों को बंद करने की मांग क्यों की जा रही है?
डॉक्टरों और कोर्ट का मानना है कि कबूतरों की बीट और पंखों से सांस और फेफड़ों की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं, इसलिए पब्लिक हेल्थ के लिए इन्हें बंद करना जरूरी है।