Maharashtra: मुंबई में दुकानों और ऑफिसों के बाहर मराठी नाम बोर्ड लगाने को लेकर अब सख्ती बढ़ सकती है। शहर के पार्षदों ने BMC प्रशासन से मांग की है कि जो दुकानें अब भी इस नियम का पालन नहीं कर रही हैं, उनके खिलाफ कड़ा एक्शन
Maharashtra: मुंबई में दुकानों और ऑफिसों के बाहर मराठी नाम बोर्ड लगाने को लेकर अब सख्ती बढ़ सकती है। शहर के पार्षदों ने BMC प्रशासन से मांग की है कि जो दुकानें अब भी इस नियम का पालन नहीं कर रही हैं, उनके खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद हजारों दुकानें अब भी नियमों की अनदेखी कर रही हैं।
मराठी बोर्ड को लेकर क्या है नियम और अब तक क्या हुआ
नियम के मुताबिक, महाराष्ट्र की सभी दुकानों और प्रतिष्ठानों को अपना नाम मराठी में लिखना जरूरी है। महाराष्ट्र शॉप्स एंड एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2017 के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि देवनागरी लिपि में लिखा गया नाम अन्य भाषाओं के अक्षरों के बराबर आकार का होना चाहिए। BMC ने 28 नवंबर 2023 से कानूनी कार्रवाई शुरू की थी। अब तक 1.58 लाख चेकिंग अभियान चलाए गए हैं और 3,774 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनसे करीब 1.91 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया है।
पार्षदों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
पार्षद तजिंदर सिंह तिवाना ने बताया कि शहर में 5,000 से ज्यादा ऐसी दुकानें हैं जहां या तो मराठी बोर्ड नहीं है या फिर मराठी अक्षरों का साइज अंग्रेजी से छोटा रखा गया है। समिति की चेयरपर्सन दीक्षा करकर ने प्रशासन के ‘टोकन उपायों’ की आलोचना की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर किसी पार्षद को ऐसी दुकान मिलती है जिसे प्रशासन ने नजरअंदाज किया है, तो संबंधित अधिकारी को मेमो जारी किया जाएगा। इसके लिए सभी 26 वार्डों के निरीक्षकों के साथ बैठक भी बुलाई गई है।
नियम न मानने पर कितना लगेगा जुर्माना
अगर कोई दुकानदार मराठी बोर्ड नहीं लगाता है, तो BMC प्रति कर्मचारी 2,000 रुपये का जुर्माना लगा सकती है। इससे पहले अप्रैल 2024 में प्रॉपर्टी टैक्स दोगुना करने और लाइसेंस रद्द करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन बाद में इस पर पुनर्विचार किया गया। जुलाई 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई की 10 लाख से ज्यादा दुकानों में से 50 प्रतिशत से भी कम दुकानों पर मराठी बोर्ड लगे हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दुकानों पर मराठी बोर्ड के लिए क्या नियम है
नियम के अनुसार सभी दुकानों को अपना नाम मराठी (देवनागरी) में लिखना होगा और मराठी अक्षरों का साइज अन्य भाषाओं के अक्षरों के बराबर या उससे बड़ा होना चाहिए।
नियम का पालन न करने पर कितनी पेनल्टी लग सकती है
BMC द्वारा नियम का उल्लंघन करने पर प्रति कर्मचारी 2,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।