Mumbai में BMC की फेरीवालों पर कार्रवाई पर मचा बवाल, नगरसभा सदस्यों ने उठाए सवाल

Maharashtra: मुंबई के फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने के लिए BMC ने जो अभियान शुरू किया है, उस पर अब राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। अलग-अलग पार्टियों के नगरसभा सदस्यों ने इस कार्रवाई के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना

Maharashtra: मुंबई के फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने के लिए BMC ने जो अभियान शुरू किया है, उस पर अब राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। अलग-अलग पार्टियों के नगरसभा सदस्यों ने इस कार्रवाई के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह ड्राइव मनमाने ढंग से चलाई जा रही है और वार्ड स्तर पर इसे ठीक से लागू नहीं किया गया है।

नगरसभा सदस्यों ने BMC की ‘Pedestrian First’ पहल का समर्थन तो किया है, लेकिन Enforcement के तरीके पर आपत्ति जताई है। सबसे ज्यादा नाराजगी उन फेरीवालों के मामले में है जिनके पास BMC द्वारा जारी किए गए QR-कोड वाले पहचान पत्र हैं, फिर भी उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। बीजेपी पार्षद शीतल गांबिर, यूबीटी शिवसेना की दीपमाला भाडे और बीजेपी की प्रीति सटम ने इस मुद्दे पर चिंता जताई है।

यह पूरा अभियान 9 अगस्त 2026 के आसपास सभी 24 प्रशासनिक वार्डों में शुरू किया गया था। BMC कमिश्नर अश्विनी भिडे ने वार्ड अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि अवैध फेरीवालों, गलत तरीके से बने रैंप, बाहर की ओर खुलने वाले गेट और सड़क पर खड़े वाहनों के खिलाफ तुरंत एक्शन लिया जाए। इस अभियान के तहत शुरुआत में 320 किलोमीटर के फुटपाथों को टारगेट किया गया है, जिसमें भीड़भाड़ वाले इलाकों को प्राथमिकता दी गई है। कार्रवाई की निगरानी के लिए एक डैशबोर्ड भी बनाया गया है जहाँ अधिकारियों को अपडेट देना होता है।

इस पूरे विवाद के पीछे एक बड़ा कारण स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 का सही से लागू न होना है। मुंबई में पिछले 12 सालों से यह कानून पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है। हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद टाउन वेंडिंग कमेटी (TVC) का गठन हुआ है। कोर्ट ने पहले भी BMC को निर्देश दिए थे कि सभी फेरीवालों का वेरिफिकेशन किया जाए, विदेशी नागरिकों के खिलाफ एक्शन लिया जाए और एक ही परिवार को कई लाइसेंस देने की समस्या को सुलझाया जाए। मुंबई हॉkers यूनियन के अध्यक्ष शशांक राव ने भी इस पूरी प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और नीतियों को सही से लागू न करने की बात कही है।