Maharashtra: मुंबई में बढ़ते निर्माण कार्यों और रिडेवलपमेंट के बीच शहर को मलबे से बचाने के लिए BMC ने कड़े कदम उठाए हैं। अब शहर में निर्माण और तोड़-फोड़ से निकलने वाले कचरे (C&D Waste) की रियल टाइम ट्रैकिंग होगी। इस
Maharashtra: मुंबई में बढ़ते निर्माण कार्यों और रिडेवलपमेंट के बीच शहर को मलबे से बचाने के लिए BMC ने कड़े कदम उठाए हैं। अब शहर में निर्माण और तोड़-फोड़ से निकलने वाले कचरे (C&D Waste) की रियल टाइम ट्रैकिंग होगी। इसके लिए BMC ने एक नया SOP जारी किया है ताकि सड़कों और खाली जमीनों पर अवैध रूप से मलबा फेंकने वालों पर लगाम कसी जा सके।
नए नियमों के तहत क्या करना होगा जरूरी
BMC के नए नियमों के मुताबिक, अब सभी बिल्डर्स, कॉन्ट्रैक्टर्स और सरकारी एजेंसियों को कचरे को शुरू में ही दो हिस्सों में बांटना होगा। एक हिस्सा खुदाई से निकला मटेरियल होगा और दूसरा निर्माण का मलबा। इन दोनों को मिलाना सख्त मना है। इसके अलावा, मलबे को ले जाने वाले सभी वाहनों में व्हीकल ट्रैकिंग एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (VTMS) लगाना अनिवार्य होगा। बिना ट्रैकिंग डिवाइस वाले वाहनों को कचरा फेंकने वाली जगहों पर एंट्री नहीं मिलेगी।
जुर्माना और सिक्योरिटी डिपॉजिट के क्या नियम हैं
नियमों का पालन न करने वालों पर BMC सख्त कार्रवाई करेगी। अगर कोई वाहन नियमों के खिलाफ पाया गया, तो प्रति वाहन 25,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। बार-बार गलती करने वालों पर और कड़ी कार्रवाई होगी। बड़े प्रोजेक्ट्स और सरकारी कामों के लिए 25 लाख रुपये या प्रोजेक्ट लागत का 0.1% (जो भी ज्यादा हो) सिक्योरिटी डिपॉजिट या बैंक गारंटी जमा करनी होगी। यह पैसा तभी वापस मिलेगा जब मलबे के सही निपटान का सबूत दिया जाएगा।
मलबे के निपटान और ट्रैकिंग का पूरा विवरण
| विवरण |
नियम/जानकारी |
| कचरा निपटान स्थल |
केवल अधिकृत रीसाइक्लिंग प्लांट या देवनार जैसे निर्धारित स्थल |
| शहर की सीमा |
मलबे को शहर की सीमा से बाहर ले जाना मना है |
| ट्रैकिंग सिस्टम |
GPS आधारित रियल टाइम मॉनिटरिंग (VTMS) |
| डिजिटल पोर्टल |
दिल्ली के मलबा पोर्टल की तर्ज पर नया डिजिटल पोर्टल बनेगा |
| प्रोसेसिंग क्षमता |
दहिसर और शिलफाटा प्लांट की क्षमता 1,200 टन प्रतिदिन |
| प्रभावी तिथि |
केंद्र सरकार के C&D नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू |