Mumbai में कचरे का संकट, Bombay High Court की फटकार के बाद BMC ने शुरू किया सफाई अभियान

Maharashtra/Mumbai: मुंबई में सड़कों, नालों और समुद्र तटों पर फैले कचरे को लेकर Bombay High Court ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने BMC की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए शहर में बड़े स्तर पर सफाई अभियान चलाने का आदेश दि

Maharashtra/Mumbai: मुंबई में सड़कों, नालों और समुद्र तटों पर फैले कचरे को लेकर Bombay High Court ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने BMC की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए शहर में बड़े स्तर पर सफाई अभियान चलाने का आदेश दिया है। इस आदेश के बाद 2 अगस्त से BMC ने पूरे शहर में सफाई अभियान शुरू कर दिया है ताकि गंदगी से राहत मिल सके।

Bombay High Court के जस्टिस G. S. Kulkarni और जस्टिस Aarti Sathe की बेंच ने 1 अगस्त को BMC को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने सवाल किया कि क्या हम अब भी एक सभ्य समाज में रह रहे हैं और कचरा फेंकने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। अदालत ने साफ कहा कि वार्ड ऑफिसर सिर्फ दफ्तरों में न बैठें, बल्कि बाहर निकलकर सफाई की निगरानी करें। कोर्ट ने विरासत स्थलों (heritage sites) के आसपास जमा कचरे को सात दिनों के भीतर हटाने का निर्देश दिया है और चेतावनी दी है कि लापरवाही बरतने पर वार्ड अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय होगी।

नगरपालिका आयुक्त Ashwini Bhide ने सभी वार्डों के असिस्टेंट कमिश्नर को नियमित निरीक्षण करने और सफाई के ऊंचे मानक बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि शहर की सफाई प्रशासन और नागरिकों दोनों की साझा जिम्मेदारी है। इसी कड़ी में BMC अब कचरा फेंकने वाले हॉटस्पॉट पर CCTV कैमरे लगा रही है और अवैध रूप से गंदगी फैलाने वालों पर भारी जुर्माना लगाएगी।

समुद्र तटों की हालत पर चिंता जताते हुए कोर्ट ने Maharashtra Pollution Control Board (MPCB) को Juhu, Mahim और Dadar Chowpatty जैसे बीचों पर आने वाले प्लास्टिक कचरे को रोकने के उपाय करने को कहा है। 2 अगस्त को भी जुहू बीच पर हाई टाइड और बारिश के बाद भारी मात्रा में प्लास्टिक कचरा देखा गया, जिसे हटाने का काम BMC ने शुरू किया।

विशेषज्ञों और लेखकों का मानना है कि कोर्ट के आदेश के बाद तो काम शुरू हो गया है, लेकिन पुराने अनुभवों को देखें तो प्लास्टिक बैन और कचरा अलग करने (segregation) जैसे अभियान पहले भी नाकाम रहे हैं। फिलहाल BMC कचरा संग्रहण के निजीकरण की योजना पर काम कर रही है, जिसे अगस्त 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। निगरानी के लिए ‘Garbage Vulnerable Points’ (GVPs) को Google Maps पर मार्क किया गया है ताकि फोटो और रिकॉर्ड के जरिए काम की ट्रैकिंग की जा सके।