Maharashtra: मुंबई के भांडुप इलाके में एक समय किम थापा का काफी दबदबा था। उन्हें लोग ‘रॉबिनहुड भाई’ और ‘सर्वोदय नगर का हीरो’ कहते थे। 23 अप्रैल 1992 को उनकी हत्या कर दी गई थी, जिसकी 34वीं बरसी पर आ
Maharashtra: मुंबई के भांडुप इलाके में एक समय किम थापा का काफी दबदबा था। उन्हें लोग ‘रॉबिनहुड भाई’ और ‘सर्वोदय नगर का हीरो’ कहते थे। 23 अप्रैल 1992 को उनकी हत्या कर दी गई थी, जिसकी 34वीं बरसी पर आज भी उनके पुराने साथी और स्थानीय लोग उन्हें याद कर रहे हैं।
कौन थे किम थापा और कैसे हुई उनकी मौत
किम थापा जिन्हें के टी या किम बहादुर के नाम से भी जाना जाता था, एक स्थानीय गैंगस्टर थे जो बाद में राजनीति में आए। वह दो बार बीएमसी कॉर्पोरेटर चुने गए और शिव सेना के उभरते नेता थे। 23 अप्रैल 1992 को भांडुप (पश्चिम) के एलबीएस रोड पर स्थित मंगतराम पेट्रोल पंप के पास उनकी हत्या कर दी गई थी। वह पास के एक रेस्टोरेंट से बाहर निकले ही थे कि एक सफेद फिएट कार में आए पांच अज्ञात हमलावरों ने उन्हें गोलियों से भून दिया था। उस समय उनकी उम्र 37 साल थी।
नेपाली समुदाय और स्थानीय लोगों के लिए क्यों थे खास
भांडुप और मुलुंड के नेपाली समुदाय के लोग किम थापा को अपना संरक्षक मानते थे। खासकर वह नेपाली लोग जो फैक्ट्रियों में गार्ड की नौकरी करते थे, उनके लिए थापा एक मददगार चेहरा थे। उन्होंने इलाके की कनेक्टिविटी सुधारने के लिए बीईएसटी बस रूट 605 और 606 को शुरू करवाने के लिए काफी पैरवी की थी। आज भी उनके पुराने साथी और शिव सेना के सदस्य भांडुप और कंजुरमार्ग में पोस्टर लगाकर उन्हें याद करते हैं।
राजनीति और अपराध के बीच का गहरा रिश्ता
किम थापा की छवि एक मददगार नेता की थी, लेकिन उनका एक दूसरा पहलू भी था। वह एक समय उग्र ट्रेड यूनियन नेता रहे थे। चर्चा थी कि 80 के दशक की शुरुआत में कंजुरमार्ग, भांडुप और मुलुंड के औद्योगिक बेल्ट में अवैध शराब के अड्डों पर उनका नियंत्रण था। उनकी हत्या ने उस दौर में राजनीति और संगठित अपराध के बीच के गहरे संबंधों को सबके सामने ला दिया था।