Maharashtra: मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट (CSMIA) ने पर्यावरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। Confederation of Indian Industry (CII) ने एयरपोर्ट को ‘जीरो वेस्ट टू लैंडफिल’ (ZWL)
Maharashtra: मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट (CSMIA) ने पर्यावरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। Confederation of Indian Industry (CII) ने एयरपोर्ट को ‘जीरो वेस्ट टू लैंडफिल’ (ZWL) के लिए सबसे ऊंची प्लैटिनम – क्लास I रेटिंग दी है। इसका मतलब है कि एयरपोर्ट से निकलने वाला लगभग सारा कचरा अब डंपिंग ग्राउंड में नहीं जाएगा बल्कि उसे रीसायकल किया जाएगा।
CSMIA ने यह मुकाम कैसे हासिल किया?
मुंबई एयरपोर्ट को संचालित करने वाली कंपनी MIAL ने कचरा प्रबंधन के लिए 5R सिद्धांतों (Reduce, Reuse, Repurpose, Recycle और Recover) को अपनाया है। एयरपोर्ट पर भोजन, प्लास्टिक, कागज और ऑपरेशनल कचरे को उनके स्रोत पर ही अलग किया जाता है। एक खास टीम इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करती है और कचरे को अधिकृत रीसायकल केंद्रों तक पहुंचाया जाता है।
पर्यावरण के लिए यह क्यों जरूरी है?
इस रेटिंग के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान कड़ी जांच की गई थी। एयरपोर्ट ने अपने कुल कचरे का 99% से ज्यादा हिस्सा लैंडफिल में जाने से रोका है। इससे पहले नवंबर 2025 में एयरपोर्ट को ACA लेवल 5 कार्बन मान्यता मिली थी और अगस्त 2022 से यह पूरी तरह ग्रीन एनर्जी पर चल रहा है।
उपलब्धियों पर एक नजर
- ZWL रेटिंग: प्लैटिनम – क्लास I (सबसे उच्च श्रेणी)
- कचरा प्रबंधन: 99% से अधिक कचरे को लैंडफिल से हटाया गया
- एनर्जी: अगस्त 2022 से 100% ग्रीन एनर्जी का उपयोग
- ऑपरेटर: MIAL (अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स और AAI का संयुक्त उद्यम)
Frequently Asked Questions (FAQs)
जीरो वेस्ट टू लैंडफिल (ZWL) रेटिंग क्या है?
यह CII द्वारा दी जाने वाली एक मान्यता है जो यह बताती है कि कोई संस्थान अपने कचरे को लैंडफिल या डंपिंग ग्राउंड में भेजने के बजाय उसे रीसायकल या रिकवर कर रहा है।
मुंबई एयरपोर्ट कचरे को कैसे मैनेज करता है?
एयरपोर्ट 5R सिद्धांतों का पालन करता है, जिसमें कचरे को अलग करना, कम करना और रीसायकल करना शामिल है, ताकि 99% से अधिक कचरा लैंडफिल में न जाए।