Mumbai-Ahmedabad Bullet Train: पहली बार भारत में लग रहे हैं Tunnel Hoods, शोर और दबाव से मिलेगी राहत
Maharashtra/Gujarat: भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना में एक नई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर पर पहली बार ‘टनल हुड्स’ (Tunnel Hoods) लगाए जा रहे हैं। ये खास बेलनाकार ढांचे सुरंग के
Maharashtra/Gujarat: भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना में एक नई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर पर पहली बार ‘टनल हुड्स’ (Tunnel Hoods) लगाए जा रहे हैं। ये खास बेलनाकार ढांचे सुरंग के प्रवेश और निकास द्वार पर बनाए जाते हैं, ताकि ट्रेन जब 300 किमी प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से सुरंग में घुसे, तो यात्रियों और आसपास के लोगों को कोई परेशानी न हो।
नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) के मुताबिक, जब इतनी तेज रफ्तार वाली ट्रेन अचानक सुरंग में जाती है, तो हवा के दबाव की वजह से एक जोरदार धमाके जैसी आवाज आती है, जिसे ‘टनल बूम’ कहा जाता है। टनल हुड्स इसी दबाव को कम करने का काम करते हैं। इनमें खास खिड़कियां और वेंटिलेशन सिस्टम होते हैं, जिससे हवा धीरे-धीरे बाहर निकलती है और सफर आरामदायक रहता है। यह तकनीक जापान, चीन और फ्रांस जैसे देशों में पहले से इस्तेमाल हो रही है।
इस प्रोजेक्ट के तहत कुल 8 पहाड़ी सुरंगों के दोनों सिरों पर 16 वेंटिलेटेड हुड्स बनाए जा रहे हैं, जिनमें से सात महाराष्ट्र और एक गुजरात में है। इन हुड्स की लंबाई और खिड़कियों की संख्या सुरंग के हिसाब से अलग-अलग रखी गई है:
| लोकेशन/सुरंग | हुड की लंबाई | खिड़कियों की संख्या |
|---|---|---|
| वलसाड (MT-8 सुरंग) | 31 मीटर | 20 खिड़कियां |
| पालघर (पहाड़ी सुरंगें) | 30 से 45 मीटर | 20 से 26 खिड़कियां |
| पालघर (MT-3 और MT-4 सुरंग) | 45 मीटर | 26 खिड़कियां |
NHSRCL के अधिकारियों ने बताया कि ये ढांचे सुरंग के पोर्टल से लगभग 30-45 मीटर बाहर तक फैले होंगे। जापानी शिंकानसेन तकनीक और JICA की फंडिंग से बन रहे इस प्रोजेक्ट में इन हुड्स के लगने से ट्रेन का एरोडायनामिक परफॉरमेंस बेहतर होगा और शोर काफी कम हो जाएगा।