Maharashtra, Gujarat: भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना में अब एक नई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के पहाड़ी इलाकों में बनी सुरंगों में Tunnel Hoods लगाए जा रहे हैं। यह कदम ट्रेन
Maharashtra, Gujarat: भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना में अब एक नई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के पहाड़ी इलाकों में बनी सुरंगों में Tunnel Hoods लगाए जा रहे हैं। यह कदम ट्रेन की रफ्तार के दौरान होने वाले शोर और हवा के दबाव को कम करने के लिए उठाया गया है।
Tunnel Hoods क्या हैं और क्यों लगाए जा रहे हैं?
जब हाई-स्पीड ट्रेन बहुत तेज रफ्तार से सुरंग के अंदर घुसती है, तो वह अपने साथ हवा का एक बड़ा हिस्सा धकेलती है। इससे सुरंग के अंदर हवा का दबाव बढ़ जाता है और बाहर की तरफ एक जोरदार धमाके जैसी आवाज आती है, जिसे Tunnel Boom Effect कहते हैं। Tunnel Hoods एक ट्रांजिशन जोन की तरह काम करते हैं, जिससे हवा धीरे-धीरे सुरंग में प्रवेश करती है और दबाव कम रहता है। इससे आसपास रहने वाले लोगों को शोर की परेशानी नहीं होगी और यात्रियों का सफर भी आरामदायक रहेगा।
डिजाइन और इसकी खासियत क्या है?
इन हुड्स को खास तौर पर डिजाइन किया गया है जिनमें प्रेशर-रिलीफ वेंट्स या खिड़कियां होती हैं। जब ट्रेन सुरंग में दाखिल होती है, तो ये वेंट्स दबी हुई हवा को धीरे-धीरे बाहर निकलने का रास्ता देते हैं। National High Speed Rail Corporation Limited (NHSRCL) के मुताबिक, भारत में रेलवे सुरंगों के लिए इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल पहली बार किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट में जापान की Shinkansen तकनीक का उपयोग हो रहा है, जिससे इसे और सुरक्षित बनाया गया है।
किन इलाकों में किया जा रहा है इस्तेमाल?
- महाराष्ट्र में बनी 7 पहाड़ी सुरंगों के दोनों सिरों पर ये हुड्स लगाए जा रहे हैं।
- गुजरात की एक पहाड़ी सुरंग में भी इस तकनीक का इस्तेमाल होगा।
- NHSRCL की अधिकारी सुषमा गौर ने अक्टूबर 2023 में ही इस टनल एंट्रेंस हुड की योजना के बारे में जानकारी दी थी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Tunnel Boom Effect क्या होता है?
जब हाई-स्पीड ट्रेन तेजी से सुरंग में घुसती है, तो हवा का भारी दबाव बनता है जिससे बाहर की तरफ तेज शोर या धमाके जैसी आवाज आती है, इसे ही टनल बूम इफेक्ट कहते हैं।
भारत में यह तकनीक पहली बार कहाँ इस्तेमाल हो रही है?
यह तकनीक पहली बार मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट की पहाड़ी सुरंगों में NHSRCL द्वारा लागू की जा रही है।