Maharashtra: मुंबई की आरती नाइक ने अपनी गरीबी और पढ़ाई में मिली नाकामयाबी को अपनी ताकत बनाया। 10वीं क्लास में फेल होने और महज 9 रुपये रोज कमाने वाली आरती ने अब मुंबई की झुग्गियों में रहने वाली 3,000 से ज्यादा लड़कियों को
Maharashtra: मुंबई की आरती नाइक ने अपनी गरीबी और पढ़ाई में मिली नाकामयाबी को अपनी ताकत बनाया। 10वीं क्लास में फेल होने और महज 9 रुपये रोज कमाने वाली आरती ने अब मुंबई की झुग्गियों में रहने वाली 3,000 से ज्यादा लड़कियों को स्कूल से जोड़े रखने में मदद की है। उन्होंने ‘Sakhi for Girls Education’ नाम से एक पहल शुरू की ताकि किसी और लड़की को गरीबी की वजह से अपनी पढ़ाई न छोड़नी पड़े।
आरती नाइक ने कैसे शुरू किया यह सफर
आरती ने अगस्त 2008 में ‘Sakhi for Girls Education’ की शुरुआत की थी। उनका मकसद मुंबई की स्लम बस्तियों और उस्मानाबाद के ग्रामीण इलाकों में लड़कियों के लिए पढ़ाई के अच्छे केंद्र बनाना था। यह प्रोग्राम स्कूल के बाद चलने वाली क्लास की तरह काम करता है, जहाँ लड़कियों को बुनियादी साक्षरता, गणित और जीवन कौशल सिखाया जाता है। आरती का लक्ष्य इन लड़कियों को इतना आत्मविश्वासी बनाना है कि वे समाज में अपनी पहचान बना सकें।
इन संस्थाओं ने दिया आरती और लड़कियों को साथ
इस नेक काम को आगे बढ़ाने में कई संस्थाओं ने आरती नाइक का सहयोग किया है। इनमें मुख्य रूप से ये नाम शामिल हैं:
| संस्था का नाम |
दी गई मदद/सहयोग |
| Ashoka’s Youth Venture |
Changemaker Fellowship और शुरुआती आर्थिक मदद |
| Klik2learn |
अंग्रेजी भाषा सुधारने के लिए ‘Journey 2 Basic Skills’ कोर्स |
| unconnected.org और 48percent.org |
इंटरनेट कनेक्टिविटी और जरूरी हार्डवेयर |
| Leap To Shine |
टैबलेट के जरिए डिजिटल लर्निंग की सुविधा |
| SLASBSS |
पंजीकृत चैरिटी जिसके जरिए फंडिंग मिलती है |
| Citizen Angel |
ऑनलाइन डोनेशन की सुविधा |
आज क्या है इस पहल का असर
आरती नाइक की यह कोशिश अब एक बड़े बदलाव का रूप ले चुकी है। मुंबई के मुलुंड इलाके की बस्तियों और उस्मानाबाद के गांवों में हजारों लड़कियां अब आत्मविश्वास के साथ स्कूल जा रही हैं। कोविड-19 के बाद डिजिटल टूल्स और इंटरनेट की मदद से उनकी पढ़ाई को बिना रुके जारी रखा गया। आरती का कहना है कि उनका जीवन का लक्ष्य इन लड़कियों को शिक्षित करना और उन्हें सशक्त बनाना है।