Mumbai ब्लास्ट केस: 18 साल जेल काटने के बाद Ehtesham अब बनेंगे वकील, Abdul Wahid ने मांगा 9 करोड़ का मुआवजा
Maharashtra: मुंबई के 7/11 ब्लास्ट केस में सालों तक जेल में रहने वाले दो आरोपियों की जिंदगी अब पूरी तरह बदल गई है। एक तरफ जहां एहतशाम सिद्दीकी जेल की सलाखों के पीछे रहकर कानून की पढ़ाई की और अब वकील बनने की तैयारी में है
Maharashtra: मुंबई के 7/11 ब्लास्ट केस में सालों तक जेल में रहने वाले दो आरोपियों की जिंदगी अब पूरी तरह बदल गई है। एक तरफ जहां एहतशाम सिद्दीकी जेल की सलाखों के पीछे रहकर कानून की पढ़ाई की और अब वकील बनने की तैयारी में हैं, वहीं अब्दुल वाहिद शेख अपनी गलत गिरफ्तारी के लिए सरकार से जवाब मांग रहे हैं।
Ehtesham Siddiqui को बॉम्बे हाई कोर्ट ने पिछले साल बरी किया था। उन्होंने अपनी जिंदगी के 18 साल जेल में बिताए, जिसमें से 10 साल तो उन्हें मौत की सजा के तौर पर काटने पड़े थे। जेल में रहते हुए ही उन्होंने कानून की बारीकियां सीखीं और खुद की डिफेंस तैयार की। अब उन्होंने Bachelor of Laws की डिग्री ले ली है और वह इलाहाबाद में बार काउंसिल में नामांकन करा रहे हैं ताकि आधिकारिक तौर पर वकालत शुरू कर सकें। इसके अलावा वह बिजनेस मैनेजमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए भी परीक्षाएं दे चुके हैं। हालांकि, मार्च 2026 में एक सत्र अदालत ने SIMI की सदस्यता के एक पुराने मामले में उन्हें दोषी ठहराया, लेकिन वह पहले ही 9 साल की सजा काट चुके हैं, इसलिए उन्हें दोबारा जेल नहीं जाना होगा। वह इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देंगे।
दूसरी तरफ Abdul Wahid Shaikh की लड़ाई मुआवजे को लेकर है। उन्हें 2015 में ही बरी कर दिया गया था और जुलाई 2025 में हाई कोर्ट ने भी इस फैसले पर मुहर लगा दी। शेख का कहना है कि 9 साल तक गलत तरीके से जेल में रखने की वजह से उन्हें भारी आर्थिक और मानसिक नुकसान हुआ है। उन्होंने NHRC और अल्पसंख्यक आयोग से 9 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की है, जिसमें हर साल के लिए 1 करोड़ रुपये शामिल हैं। उनका कहना है कि उन पर करीब 30 लाख का कर्ज है और परिवार को सामाजिक बदनामी झेलनी पड़ी। हालांकि NHRC ने देरी का हवाला देते हुए उनकी मांग खारिज कर दी है।
अब्दुल वाहिद ने जेल के दौरान ही अपनी शिक्षा पूरी की और मुंबई यूनिवर्सिटी से LLM की डिग्री ली। उन्होंने ‘बेगुनाह कैदी’ नाम की किताब भी लिखी है और ‘Innocence Network’ नाम का एक समूह बनाया है, जो उन लोगों की मदद करता है जिन्हें आतंकवाद के झूठे मामलों में फंसाया जाता है। वह अपने यूट्यूब चैनल ‘Acquit Undertrial’ के जरिए भी ऐसे लोगों की कहानियां साझा करते हैं।