MP और Chhattisgarh में मानसून की सुस्ती से किसान परेशान, धान की रोपाई सिर्फ 18% तक सिमटी

MP/Chhattisgarh: मानसून आने के एक महीने बाद भी कई इलाकों में बारिश की स्थिति ठीक नहीं है, जिससे खेती पर बुरा असर पड़ रहा है। खासतौर पर धान की रोपाई का काम बहुत धीमा है और कुछ क्षेत्रों में यह अब तक सिर्फ 18% ही हो पाई है

MP/Chhattisgarh: मानसून आने के एक महीने बाद भी कई इलाकों में बारिश की स्थिति ठीक नहीं है, जिससे खेती पर बुरा असर पड़ रहा है। खासतौर पर धान की रोपाई का काम बहुत धीमा है और कुछ क्षेत्रों में यह अब तक सिर्फ 18% ही हो पाई है। बारिश की कमी की वजह से किसान अब अपनी फसलों को लेकर चिंतित हैं।

India Meteorological Department (IMD) के मुताबिक, पूरे देश में मानसून 2 जुलाई तक पहुंच गया था, लेकिन बारिश का वितरण एक जैसा नहीं रहा। जुलाई में राष्ट्रीय औसत के हिसाब से तो बारिश ज्यादा हुई, लेकिन कई राज्यों में भारी कमी दर्ज की गई। मध्य प्रदेश के 55 में से 28 जिलों में मानसून ब्रेक की वजह से फसलें सूख रही हैं और रोपाई का काम रुक गया है। यहां कुछ जिलों में सामान्य से 16% से 78% तक कम बारिश हुई है।

छत्तीसगढ़ में भी हालात कुछ वैसे ही हैं, जहां मानसून की धीमी रफ्तार और 45% से 80% तक की बारिश की कमी ने धान की बुवाई में देरी कर दी है। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में 2.80 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 65 हेक्टेयर में रोपाई हुई, जबकि दतिया में 97,000 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले केवल 5,850 हेक्टेयर में काम हो पाया है।

हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर देखा जाए तो 15 जुलाई तक धान की खेती का रकबा पिछले साल के मुकाबले 20.75% बढ़ा है और कुल 11.56 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र कवर हुआ है। लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर बारिश की यह असमानता किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ला नीना (La Niña) के बनने में देरी होने से खरीफ फसलों की बुवाई पर आगे भी असर पड़ सकता है।