Middle East में तनाव के बाद बढ़े कच्चे तेल के दाम, Brent Crude पहुंचा 84.64 डॉलर; आम आदमी की जेब पर पड़ेगा असर

Finance : मिडिल ईस्ट में एक बार फिर सैन्य हमलों और तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। इस वजह से ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। Brent Crude की कीमतों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की ते

Finance : मिडिल ईस्ट में एक बार फिर सैन्य हमलों और तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। इस वजह से ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। Brent Crude की कीमतों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखी गई है, जिससे दुनिया भर के बाजारों में हलचल मच गई है।

ताजा जानकारी के मुताबिक 29 जुलाई 2026 को Brent Crude के दाम 84.64 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचे, जो पिछले बंद भाव से 3.12 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं US West Texas Intermediate (WTI) के दाम 3.57 प्रतिशत बढ़कर 82.09 डॉलर प्रति बैरल हो गए। इससे पहले तेल की कीमतें लगातार तीन दिनों से गिर रही थीं, लेकिन इन हमलों ने इस गिरावट को रोक दिया है।

तनाव की मुख्य वजह ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियां हैं। US Central Command (CENTCOM) ने पुष्टि की कि ईरान ने जॉर्डन में तैनात अमेरिकी सेना पर मिसाइल हमला किया। वहीं 28 जुलाई को अमेरिका और सऊदी अरब ने मिलकर इराक में ईरान समर्थित समूहों पर सटीक हमले किए। सऊदी अरब के पेट्रोलियम केंद्रों पर हुए ड्रोन हमलों के जवाब में यह कार्रवाई की गई थी।

विवरण कीमत/डेटा बदलाव
Brent Crude (अक्टूबर) $84.64 प्रति बैरल 3.12% बढ़त
WTI Crude (सितंबर) $82.09 प्रति बैरल 3.57% बढ़त
अधिकतम स्तर (जुलाई) $102 प्रति बैरल अस्थायी उछाल

तेल की सप्लाई को लेकर सबसे बड़ी चिंता Strait of Hormuz को लेकर है। ईरान ने कहा है कि इस समुद्री रास्ते को खोलने के लिए उसकी शर्तों को मानना होगा और कुछ शिपिंग लेन उसके नियंत्रण में रहेंगे। ईरान ने चेतावनी दी है कि जो टैंकर उनके बताए रास्तों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के डायरेक्टर फातिह बिरोल ने कहा कि बढ़ती सैन्य गतिविधियां वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। वर्ल्ड बैंक ने भी इसे कमोडिटी मार्केट के लिए एक बड़ा झटका बताया है। भारत जैसे देशों में जहां तेल आयात किया जाता है, वहां कीमतों में इस तरह की अस्थिरता से महंगाई बढ़ सकती है और पेट्रोल-डीजल के दाम प्रभावित हो सकते हैं।