Delhi: ग्रीन जॉब्स की बढ़ती डिमांड, Masters’ Union ने शुरू किया सस्टेनेबिलिटी प्रोग्राम, युवाओं को मिलेंगे नौकरी के नए मौके

Delhi: भारत में ग्रीन इकोनॉमी यानी पर्यावरण के अनुकूल बिजनेस का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। इस सेक्टर में नौकरियों की मांग तो बढ़ रही है, लेकिन सही ट्रेनिंग वाले लोगों की कमी है। इसी कमी को पूरा करने के लिए Masters’

Delhi: भारत में ग्रीन इकोनॉमी यानी पर्यावरण के अनुकूल बिजनेस का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। इस सेक्टर में नौकरियों की मांग तो बढ़ रही है, लेकिन सही ट्रेनिंग वाले लोगों की कमी है। इसी कमी को पूरा करने के लिए Masters’ Union ने एक खास पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम शुरू किया है, ताकि युवाओं को आने वाले समय की नौकरियों के लिए तैयार किया जा सके।

Deloitte की 2025 सी-सुइट सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर के बिजनेस लीडर्स के लिए सस्टेनेबिलिटी अब AI और टेक्नोलॉजी की तरह ही एक बड़ी प्राथमिकता बन गई है। कंपनियों को अब ऐसे प्रोफेशनल्स की जरूरत है जो ESG (एनवायरनमेंट, सोशल और गवर्नेंस), क्लाइमेट स्ट्रेटजी और सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग को समझते हों। वहीं NLB सर्विसेज की एक रिपोर्ट बताती है कि वित्त वर्ष 2028 तक भारत में करीब 72.9 लाख नई ग्रीन जॉब्स जुड़ेंगी। इनमें रिन्यूएबल एनर्जी, क्लाइमेट कंसल्टिंग और कॉर्पोरेट ESG टीमों में काम करने के मौके शामिल होंगे।

इन जरूरतों को देखते हुए Masters’ Union ने 16 महीने का ‘सस्टेनेबिलिटी एंड बिजनेस मैनेजमेंट’ प्रोग्राम लॉन्च किया है। यह कोर्स पूरी तरह से इंडस्ट्री की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसमें छात्रों को किताबी ज्ञान के बजाय लाइव प्रोजेक्ट्स और एक्सपर्ट्स की मेंटरशिप दी जाएगी, ताकि वे समझ सकें कि कंपनियां असल में जलवायु समस्याओं को कैसे सुलझा रही हैं।

  • कोर्स की अवधि: 16 महीने (कुछ विवरणों में 12 महीने का इमर्सिव प्रोग्राम भी बताया गया है)।
  • मुख्य विषय: ESG सिद्धांत, कार्बन मार्केट, क्लाइमेट फाइनेंस, रिन्यूएबल एनर्जी बिजनेस मॉडल और सर्कुलर इकोनॉमी।
  • खासियत: छात्रों को जेनेवा, एम्स्टर्डम, सिंगापुर और दुबई जैसे ग्लोबल बिजनेस हब में जाने का मौका मिलेगा।
  • मेंटर्स: इस प्रोग्राम में NASA, ग्लोबल क्लाइमेट फंड्स और फॉर्च्यून 500 कंपनियों के ESG एक्सपर्ट्स सिखाएंगे।

मास्टर्स यूनियन की मैनेजिंग डायरेक्टर स्वाति गनेटी और प्रोग्राम हेड डॉ. अनुश्री पोद्दार ने बताया कि अब सस्टेनेबिलिटी सिर्फ एक विकल्प नहीं बल्कि बिजनेस की मुख्य रणनीति बन चुकी है। इस कोर्स के जरिए छात्रों को लो-कार्बन सप्लाई चेन और वेस्ट-टू-वेल्थ जैसे नए बिजनेस मॉडल सिखाए जाएंगे, जिससे उन्हें करियर में बढ़त मिलेगी।