Haryana: गुरुग्राम की एक अदालत ने मानेसर में हुई हिंसा के मामले में गिरफ्तार तीन फैक्ट्री मजदूरों को जमानत दे दी है। जज ने अपने आदेश में साफ कहा कि बढ़ते खर्चों को देखते हुए सैलरी बढ़ाने की मांग करना कोई अपराध नहीं है। य
Haryana: गुरुग्राम की एक अदालत ने मानेसर में हुई हिंसा के मामले में गिरफ्तार तीन फैक्ट्री मजदूरों को जमानत दे दी है। जज ने अपने आदेश में साफ कहा कि बढ़ते खर्चों को देखते हुए सैलरी बढ़ाने की मांग करना कोई अपराध नहीं है। यह फैसला 2 जून 2026 को एडिशनल सेशंस जज डॉ. गगन गीत कौर ने सुनाया।
कोर्ट ने मजदूरों की स्थिति पर क्या कहा?
अदालत ने मजदूरों के परिवारों की हालत पर गहरी चिंता जताई। जज ने सवाल किया कि जब मजदूर जेल में थे, तब उनके बच्चों ने बिना तनख्वाह के कैसे गुजारा किया होगा। कोर्ट ने इसे सिस्टम की विडंबना बताया और कहा कि इस बात पर गंभीर सोच की जरूरत है। कोर्ट के मुताबिक, इन मजदूरों को अब और हिरासत में रखने का कोई फायदा नहीं होगा।
पुलिस के आरोपों और कोर्ट की राय में क्या अंतर था?
पुलिस ने आरोप लगाया था कि मजदूरों ने अधिकारियों पर जानलेवा हमला किया और कंपनी की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। पुलिस का दावा था कि यह एक साजिश थी जिसे WhatsApp के जरिए अंजाम दिया गया। वहीं, कोर्ट ने कहा कि 9 अप्रैल की घटना साजिश थी या किसी और वजह से हुई, यह ट्रायल के दौरान तय होगा। इससे पहले कोर्ट ने यूनियन लीडर अजीत सिंह को भी जमानत दे दी थी क्योंकि उनके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले थे।
मामला कहाँ का है और क्या था विवाद?
यह पूरा विवाद मानेसर के IMT इलाके में स्थित Richa Global Exports टेक्सटाइल यूनिट का है। यहाँ 9 अप्रैल 2026 को मजदूरों में भारी unrest (अशांति) फैली थी। इससे पहले Honda Motorcycle और Modelama Exports के मजदूरों ने भी अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया था। पुलिस ने इस मामले में कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया था।
Frequently Asked Questions (FAQs)
गुरुग्राम कोर्ट ने मजदूरों को जमानत क्यों दी?
कोर्ट ने माना कि बढ़ते खर्चों के बीच सैलरी बढ़ाने की मांग करना अपराध नहीं है और हिरासत में रखने से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा।
यह हिंसा कब और कहाँ हुई थी?
यह हिंसा 9 अप्रैल 2026 को मानेसर के IMT स्थित Richa Global Exports फैक्ट्री में मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई थी।