Maharashtra: राज्य की महिलाओं में मोटापा और वजन बढ़ने की समस्या तेजी से बढ़ रही है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 (NFHS-6) के नए आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र में हर तीन में से एक महिला ओवरवेट या मोटापे का शिकार है। यह स्थ
Maharashtra: राज्य की महिलाओं में मोटापा और वजन बढ़ने की समस्या तेजी से बढ़ रही है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 (NFHS-6) के नए आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र में हर तीन में से एक महिला ओवरवेट या मोटापे का शिकार है। यह स्थिति शहरी इलाकों में और भी ज्यादा गंभीर है, जिससे आने वाले समय में सेहत से जुड़ी बड़ी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
महाराष्ट्र में मोटापे और डायबिटीज के क्या आंकड़े हैं?
सर्वे के मुताबिक, महाराष्ट्र में 31.1% महिलाएं ओवरवेट या मोटापे की श्रेणी में हैं, जबकि NFHS-5 में यह आंकड़ा 23.5% था। शहरी इलाकों की बात करें तो यहां 40.1% महिलाएं और 41.7% पुरुष मोटापे से जूझ रहे हैं। इसके साथ ही डायबिटीज का खतरा भी बढ़ा है, जहां 16% महिलाएं और 17.7% पुरुष इस बीमारी का सामना कर रहे हैं।
दक्षिण भारत के राज्यों का क्या हाल है?
मोटापे के मामले में दक्षिण भारतीय राज्यों की स्थिति महाराष्ट्र से भी ज्यादा खराब है। केरल में सबसे ज्यादा 46.7% महिलाएं ओवरवेट या मोटापे की शिकार हैं। इसके अलावा तमिलनाडु में 44.2%, आंध्र प्रदेश में 41.5% और कर्नाटक में 41.2% महिलाओं में यह समस्या देखी गई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने क्या चेतावनी दी है?
Ministry of Health and Family Welfare (MoHFW) ने कहा है कि लाइफस्टाइल में बदलाव और गलत खान-पान की वजह से गैर-संचारी रोग (NCDs) बढ़ रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर मोटापे और डायबिटीज पर काबू नहीं पाया गया, तो अगले दस सालों में महाराष्ट्र के हेल्थ सिस्टम पर बहुत दबाव पड़ेगा। गर्भवती महिलाओं में मोटापे की वजह से C-section डिलीवरी का खतरा बढ़ जाता है, जिसका असर बच्चों की सेहत पर भी पड़ता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
NFHS-6 सर्वे क्या है और इसे किसने जारी किया?
यह नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 है जिसे भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने जारी किया है। इस सर्वे का समन्वय IIPS मुंबई ने किया है।
महाराष्ट्र के शहरी इलाकों में मोटापे की स्थिति क्या है?
शहरी महाराष्ट्र में 40.1% महिलाएं और 41.7% पुरुष ओवरवेट या मोटापे की श्रेणी में आते हैं। कुल मिलाकर 40% से ज्यादा शहरी वयस्क इस समस्या से प्रभावित हैं।