Maharashtra: पालघर जिले में एक महिला को फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। यह महिला पुणे के दौंड की रहने वाली Rupali Tengle है, जिसने जिला परिषद में लैब टेक्नीशियन
Maharashtra: पालघर जिले में एक महिला को फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। यह महिला पुणे के दौंड की रहने वाली Rupali Tengle है, जिसने जिला परिषद में लैब टेक्नीशियन की नौकरी पाई थी। पुलिस ने उसे 12 मई 2026 को गिरफ्तार कर चार दिन की रिमांड पर लिया है।
कैसे खुला फर्जीवाड़े का मामला
Rupali Tengle ने अगस्त 2023 के विज्ञापन के तहत आवेदन किया था और अक्टूबर 2024 में उसे नियुक्ति मिली। हालांकि, दिसंबर 2024 में जांच के दौरान पता चला कि उसका दिव्यांग सर्टिफिकेट मेडिकल बोर्ड से मंजूर नहीं था। उसने धुले के श्री भाऊसाहेब हिरे सरकारी मेडिकल कॉलेज से सर्टिफिकेट बनवाया था, लेकिन कॉलेज ने जांच में कहा कि उनके पास ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है। इस गड़बड़ी के बाद 10 जून 2025 को पालघर जिला परिषद के CEO ने उसकी नौकरी खत्म कर दी थी।
नियम क्या हैं और क्या होगी सजा
महाराष्ट्र सरकार ने अब सभी दिव्यांग सर्टिफिकेट की जांच अनिवार्य कर दी है। नियमों के मुताबिक, अगर किसी की दिव्यांगता 40% से कम है या सर्टिफिकेट फर्जी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। Persons with Disabilities Act, 2016 की धारा 11 के तहत दोषी को 2 साल तक की जेल या 1 लाख रुपये जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी 10 मई 2026 को कहा कि फर्जी दावे कर नौकरी पाना नैतिक पतन के समान है।
राज्य भर में चल रहा है वेरिफिकेशन अभियान
सरकार ने 18 सितंबर 2025 से पूरे राज्य में जिला परिषद कर्मचारियों के सर्टिफिकेट की जांच शुरू की थी। इस अभियान के तहत अब तक कई बड़े खुलासे हुए हैं। दिसंबर 2025 तक अलग-अलग विभागों के 719 कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतें मिली थीं। मार्च 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, 28 जिला परिषदों में 6,218 सर्टिफिकेट चेक किए गए, जिनमें से 316 कर्मचारियों को फर्जी दस्तावेज जमा करने के कारण सस्पेंड किया जा चुका है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट से नौकरी पाने पर क्या सजा हो सकती है?
Persons with Disabilities Act, 2016 के तहत दोषी व्यक्ति को 2 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
महाराष्ट्र सरकार ने वेरिफिकेशन के लिए क्या समय सीमा तय की थी?
सरकार ने 9 अक्टूबर 2025 को निर्देश दिया था कि सभी विभागों को 8 जनवरी 2026 तक सर्टिफिकेट का वेरिफिकेशन पूरा करना होगा।