Maharashtra में करोड़ों का व्हीकल फिटनेस घोटाला, मुंबई और ठाणे समेत 9 RTO के अधिकारी रडार पर
Maharashtra : राज्य के ट्रांसपोर्ट कमिश्नर Rajesh Narvekar ने कमर्शियल गाड़ियों के फिटनेस सर्टिफिकेट में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच शुरू की है। इस बड़े फर्जीवाड़े में मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई समेत कुल नौ क्षेत्र
Maharashtra : राज्य के ट्रांसपोर्ट कमिश्नर Rajesh Narvekar ने कमर्शियल गाड़ियों के फिटनेस सर्टिफिकेट में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच शुरू की है। इस बड़े फर्जीवाड़े में मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई समेत कुल नौ क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) शामिल हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि बिना किसी जांच के ही कई गाड़ियों को फिटनेस सर्टिफिकेट दे दिए गए, जिससे सड़कों पर असुरक्षित गाड़ियां चलने लगीं और आम लोगों की जान खतरे में पड़ गई।
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रांसपोर्ट मंत्री Pratap Sarnaik ने सख्त निर्देश दिए हैं कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ कोई समझौता नहीं किया जाएगा और कड़ी कार्रवाई होगी। जांच के दायरे में फिलहाल 20 से 30 अधिकारी हैं। यह घोटाला तब सामने आया जब बीड़ के एक RTO इंस्पेक्टर ने शिकायत की कि गाड़ियों की फिजिकल जांच किए बिना ही ऑनलाइन सर्टिफिकेट जारी किए जा रहे हैं।
इस फर्जीवाड़े के पीछे एक बड़ा साइबर नेटवर्क काम कर रहा था। पुलिस ने नोएडा के रहने वाले Ashish Kadiyan नाम के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को गिरफ्तार किया है। आरोपी National Informatics Centre (NIC) के डेटाबेस में सेंध लगाकर फर्जी सर्टिफिकेट जारी कर रहा था। पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह ने सिस्टम की कमियों का फायदा उठाया और बिना जरूरी सुरक्षा उपकरणों जैसे स्पीड लिमिटिंग डिवाइस और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) के ही गाड़ियों को पास कर दिया।
| तारीख | महत्वपूर्ण घटना |
|---|---|
| 29 जुलाई 2026 | नोएडा के सॉफ्टवेयर इंजीनियर Ashish Kadiyan की गिरफ्तारी |
| 31 जुलाई 2026 | ट्रांसपोर्ट मंत्री Pratap Sarnaik ने सख्त कार्रवाई के आदेश दिए |
| 1 अगस्त 2026 | फॉर्म 38A के तहत फिटनेस सर्टिफिकेट की अनियमितताओं की जांच शुरू |
| 11 अगस्त 2026 | ट्रांसपोर्ट कमिश्नर Rajesh Narvekar ने हाई-लेवल जांच शुरू की |
अब सरकार इस धांधली को रोकने के लिए सभी ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन्स (ATS) के लिए एक समान Standard Operating Procedure (SOP) लागू करेगी। इसके तहत प्राइवेट टेस्टिंग सेंटरों पर मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर्स की तैनाती की जाएगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। ट्रांसपोर्ट कमिश्नर एक महीने के भीतर अपनी फाइनल रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपेंगे।