Maharashtra में एलोपैथी बनाम होम्योपैथी विवाद, 5 अगस्त से रेजिडेंट डॉक्टर्स की अनिश्चितकालीन हड़ताल

Maharashtra: महाराष्ट्र के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। राज्य के रेजिडेंट डॉक्टर्स ने 5 अगस्त की आधी रात से पूरे प्रदेश में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला किय

Maharashtra: महाराष्ट्र के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। राज्य के रेजिडेंट डॉक्टर्स ने 5 अगस्त की आधी रात से पूरे प्रदेश में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला किया है। यह विवाद होम्योपैथी डॉक्टरों को आधुनिक चिकित्सा (Allopathy) की दवाइयां लिखने की अनुमति देने के सरकारी प्रस्ताव के कारण शुरू हुआ है।

मामला तब बढ़ा जब महाराष्ट्र सरकार के चिकित्सा शिक्षा और औषधि विभाग ने 3 अगस्त 2026 को एक सरकारी प्रस्ताव (GR) जारी किया। इस प्रस्ताव के तहत एक छह सदस्यीय कमेटी बनाई गई है, जो उन होम्योपैथी डॉक्टरों (BHMS) के लिए गाइडलाइन्स तय करेगी जिन्होंने मॉडर्न फार्माकोलॉजी का सर्टिफिकेट कोर्स (CCMP) किया है। महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) ने पहले ही जून में ऐसी अनुमति दे दी थी, जिसका रेजिडेंट डॉक्टर्स और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने कड़ा विरोध किया है।

डॉक्टर्स का कहना है कि केवल छह महीने का कोर्स करने के बाद एलोपैथी दवाइयां लिखने की अनुमति देना मरीज की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। MARD के सेंट्रल प्रेसिडेंट डॉ. अथर्व शिंदे और जनरल सेक्रेटरी डॉ. सुयश धवने ने साफ किया कि यह विरोध किसी चिकित्सा पद्धति के खिलाफ नहीं है, बल्कि पेशेवर जवाबदेही और मरीजों की सुरक्षा के लिए है। IMA महाराष्ट्र के अध्यक्ष डॉ. संतोष कुलकर्णी ने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले भरोसा दिया था कि हाई कोर्ट का फैसला आने तक ऐसी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।

हड़ताल के असर को इस तरह समझा जा सकता है कि 5 अगस्त की आधी रात से शुरू होने वाले पहले 24 घंटों में केवल इमरजेंसी और कैजुअल्टी सेवाएं चालू रहेंगी। लेकिन सरकारी मेडिकल कॉलेजों के सभी OPD, रूटीन ड्यूटी और पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी गतिविधियां बंद रहेंगी। अगर सरकार ने कोई सकारात्मक समाधान नहीं निकाला, तो 6 अगस्त से इमरजेंसी सेवाओं सहित सभी रेजिडेंट डॉक्टर्स की सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी जाएंगी।

इस विरोध प्रदर्शन में रेजिडेंट डॉक्टर्स ने अपनी अन्य पुरानी मांगों को भी जोड़ा है। इसमें उनका स्टाइपेंड (मानदेय), काम करने की स्थिति, कार्यस्थल पर सुरक्षा और शैक्षणिक कल्याण जैसे मुद्दे शामिल हैं। दूसरी तरफ, महाराष्ट्र काउंसिल ऑफ होम्योपैथी के प्रशासक डॉ. बाहुबली शाह ने कहा है कि सरकार ने कोर्ट की कार्यवाही के अधीन रहते हुए रजिस्ट्रेशन के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।