Maharashtra में 5 साल में बंद हुईं 36,211 कंपनियां, कांग्रेस ने सरकार पर लगाया भ्रष्टाचार का आरोप
Maharashtra: राज्य में बिजनेस और कंपनियों के बंद होने को लेकर राजनीति गरमा गई है। लोकसभा में पेश आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच सालों में महाराष्ट्र की 36,211 प्राइवेट कंपनियां बंद हुई हैं। इस खबर के बाद कांग्रेस और NCP
Maharashtra: राज्य में बिजनेस और कंपनियों के बंद होने को लेकर राजनीति गरमा गई है। लोकसभा में पेश आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच सालों में महाराष्ट्र की 36,211 प्राइवेट कंपनियां बंद हुई हैं। इस खबर के बाद कांग्रेस और NCP ने सरकार को घेर लिया है, जबकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन आंकड़ों का दूसरा पहलू सामने रखा है।
केंद्रीय कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) ने 10 अगस्त 2026 को लोकसभा में बताया कि राज्य में इतनी बड़ी संख्या में कंपनियां लिक्विडेट हुई हैं या उनका रजिस्ट्रेशन रद्द किया गया है। इसमें सबसे ज्यादा असर मुंबई, पुणे और ठाणे जैसे बड़े शहरों में देखा गया है। बिजनेस सर्विसेज सेक्टर में सबसे ज्यादा 14,613 कंपनियां बंद हुईं।
| शहर/क्षेत्र | बंद कंपनियों की संख्या |
|---|---|
| मुंबई | 12,009 |
| पुणे | 6,433 |
| ठाणे | 4,704 |
| बिजनेस सर्विसेज सेक्टर | 14,613 |
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार हकीकत नहीं मान रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार और कमीशन कल्चर की वजह से कंपनियां राज्य छोड़कर जा रही हैं। सपकल ने अहिल्यानगर जिले में निबे ग्रुप को बिना टेंडर के 1,500 एकड़ खेती की जमीन 50 साल के लिए लीज पर देने का मामला उठाते हुए इसे बड़ा घोटाला बताया।
दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सफाई देते हुए कहा कि इन 36,211 कंपनियों में से 76% ऐसी थीं जो कभी शुरू ही नहीं हुई थीं और सिर्फ कागजों पर थीं। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने देशभर में ऐसी निष्क्रिय कंपनियों के खिलाफ अभियान चलाया था, इसलिए ये आंकड़े दिख रहे हैं। फडणवीस ने दावा किया कि महाराष्ट्र आज भी देश में सबसे ज्यादा सक्रिय कंपनियों वाला राज्य है, जिसकी संख्या जून 2026 तक 396,211 थी।
NCP (SP) प्रमुख शरद पवार और रोहित पवार ने भी इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना की। रोहित पवार का कहना है कि अगर कंपनियां काम शुरू ही नहीं कर पाईं, तो यह सरकारी नीतियों की विफलता है। उन्होंने यूपी, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां नई कंपनियों के रजिस्ट्रेशन की रफ्तार महाराष्ट्र से ज्यादा रही है। साथ ही उन्होंने चाकण इंडस्ट्रियल एरिया में बुनियादी सुविधाओं की कमी और कंपनियों के पलायन का मुद्दा भी उठाया।
मुख्यमंत्री ने माना कि चाकण क्षेत्र में कुछ समस्याएं हैं और इसके समाधान के लिए 12 अगस्त 2026 को एक हाई-लेवल मीटिंग की गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी इंडस्ट्री को राज्य से बाहर जाने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।