Mumbai के पास मानसून टूरिज्म पर सरकार की सख्ती, कई झरने और ट्रेकिंग रूट बंद, उल्लंघन करने पर होगी जेल

Maharashtra: मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में भारी बारिश के बाद महाराष्ट्र सरकार ने मानसून टूरिज्म को लेकर कड़े नियम लागू किए हैं। भारी बारिश, लैंडस्लाइड और जलभराव के खतरे को देखते हुए सरकार ने लोगों को झरनों, समुद्र तट

Maharashtra: मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में भारी बारिश के बाद महाराष्ट्र सरकार ने मानसून टूरिज्म को लेकर कड़े नियम लागू किए हैं। भारी बारिश, लैंडस्लाइड और जलभराव के खतरे को देखते हुए सरकार ने लोगों को झरनों, समुद्र तटों और पहाड़ी इलाकों में न जाने की सलाह दी है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

महाराष्ट्र के आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन ने साफ कहा है कि मुंबई और आसपास के इलाकों में पर्यटन के लिए बाहर निकलना खतरनाक हो सकता है। पिछले कुछ दिनों में मुंबई में इतनी बारिश हुई है जो आमतौर पर पूरे जुलाई महीने में होती है। इस वजह से कई सड़कें और रेलवे ट्रैक बंद हैं, जिसमें पुणे-मुंबई कॉरिडोर भी शामिल है। सरकार ने कई इलाकों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है।

इस बार मानसून ट्रेकिंग के नियम पिछले दस सालों में सबसे सख्त रखे गए हैं। पुलिस और वन विभाग सीसीटीवी और अंडरकवर अधिकारियों के जरिए निगरानी कर रहे हैं। कई लोकप्रिय ट्रेकिंग रूट पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं और वहां जाने पर आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है।

जिला/क्षेत्र प्रतिबंध और नियम
पुणे (लोनावला) 6 जुलाई से 31 जुलाई तक BNSS की धारा 163 लागू। झरने, नदी और बांध में जाना मना है। सेल्फी लेना, रील बनाना और शराब पीना प्रतिबंधित है।
ठाणे सभी किलों, झरनों, बांधों और झीलों पर पर्यटन पर पूरी तरह रोक है।
रायगढ़ ताम्हिणी सैंक्चुअरी 1 जुलाई से 30 सितंबर तक बंद रहेगी।
नवी मुंबई (खारघर/तलोजा) पांडवगडा झरना, चाफेवाडी, फणासवाडी और ओवे कैंप डैम जैसे खतरनाक इलाकों में एंट्री पूरी तरह बंद है।
वन्यजीव अभयारण्य टाइगर रिजर्व के कोर एरिया 15 जून से 30 सितंबर तक बंद रहेंगे, लेकिन बफर जोन खुले रहेंगे।

अगर आप फिर भी यात्रा करना चाहते हैं, तो प्रशासन ने कुछ सुरक्षित रास्तों जैसे लोहगढ़, विसापुर, राजमाची और कोरीगढ़ के ट्रेल्स की सलाह दी है, लेकिन सावधानी जरूरी है। मलशेज घाट के लिए परमिट सिस्टम लागू है। ट्रेकर्स के लिए अच्छी ग्रिप वाले जूते, रेन पोंचो, वाटरप्रूफ फोन पाउच और हेड-टॉर्च रखना जरूरी है। पश्चिमी घाट के रास्तों पर लीच सॉक्स या नमक का इस्तेमाल करने को कहा गया है।

नियमों के मुताबिक, अब सैंक्चुअरी ट्रेल्स पर अकेले ट्रेकिंग करना मना है और कम से कम 4 लोगों का ग्रुप होना चाहिए। साथ ही, नेशनल पार्क और वन्यजीव अभयारण्यों में प्लास्टिक की बोतलें ले जाना प्रतिबंधित है। घाटों पर गाड़ी चलाते समय स्पीड कम रखने और लो-बीम हेडलाइट का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।