Maharashtra: महाराष्ट्र एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (MAT) ने नासिक पुलिस के एक पूर्व हेड कॉन्स्टेबल युवराज पाटिल की बर्खास्तगी को रद्द कर दिया है। ट्रिब्यूनल ने माना कि नासिक पुलिस कमिश्नरेट ने बिना किसी विभागीय जांच के उ
Maharashtra: महाराष्ट्र एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (MAT) ने नासिक पुलिस के एक पूर्व हेड कॉन्स्टेबल युवराज पाटिल की बर्खास्तगी को रद्द कर दिया है। ट्रिब्यूनल ने माना कि नासिक पुलिस कमिश्नरेट ने बिना किसी विभागीय जांच के उन्हें नौकरी से निकालकर मनमानी की। यह फैसला 1 मई 2026 को सामने आया, जिसमें कोर्ट ने कहा कि बिना ठोस कारण बताए जांच से बचना गलत था।
युवराज पाटिल को क्यों किया गया था बर्खास्त?
युवराज पाटिल पर 2022 के एक ड्रग केस में आरोप लगे थे। उन पर गंभीर कदाचार और ड्रग तस्करों समेत अपराधियों के साथ संबंध रखने का आरोप था। इसी आधार पर नासिक पुलिस चीफ ने संविधान के अनुच्छेद 311(2)(b) का इस्तेमाल करते हुए उन्हें बिना किसी विभागीय जांच के नौकरी से निकाल दिया था।
MAT ने अपने फैसले में क्या कहा?
जस्टिस मंगेश एस पाटिल और सदस्य ए एम कुलकर्णी की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने साफ किया कि सिर्फ आरोप गंभीर होने से किसी कर्मचारी को बिना मौका दिए नहीं निकाला जा सकता। अनुच्छेद 311 के तहत सरकारी कर्मचारी को अपनी बात रखने और बचाव करने का पूरा मौका मिलना चाहिए। ट्रिब्यूनल ने कहा कि नासिक पुलिस ने जांच न करने का कोई वाजिब कारण रिकॉर्ड में नहीं रखा था, इसलिए यह कार्रवाई गलत थी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
युवराज पाटिल को किन आरोपों में नौकरी से निकाला गया था?
युवराज पाटिल पर 2022 के एक ड्रग केस में संलिप्तता, गंभीर कदाचार और ड्रग तस्करों जैसे अपराधियों के साथ संबंध रखने के आरोप थे।
MAT ने पुलिस विभाग के फैसले को क्यों पलटा?
ट्रिब्यूनल ने पाया कि पुलिस कमिश्नरेट ने बिना किसी विभागीय जांच के पाटिल को बर्खास्त किया और इसका कोई ठोस कारण नहीं दिया, जो कि अनुच्छेद 311 के नियमों के खिलाफ था।