Maharashtra: राज्य में अब ऑटो रिक्शा और टैक्सी चलाने वाले ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा जानना अनिवार्य होगा। 1 मई 2026 से लागू होने वाले इस नियम के तहत ड्राइवरों को मराठी पढ़ने, लिखने और बोलने की क्षमता दिखानी होगी। परिवहन
Maharashtra: राज्य में अब ऑटो रिक्शा और टैक्सी चलाने वाले ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा जानना अनिवार्य होगा। 1 मई 2026 से लागू होने वाले इस नियम के तहत ड्राइवरों को मराठी पढ़ने, लिखने और बोलने की क्षमता दिखानी होगी। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने मंगलवार, 14 अप्रैल को इस फैसले की आधिकारिक घोषणा की है।
नया नियम क्या है और कैसे होगा लागू
परिवहन विभाग राज्य के 59 क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय कार्यालयों के जरिए एक विशेष जांच अभियान चलाएगा। इस अभियान में ड्राइवरों की मराठी भाषा की जानकारी जांची जाएगी। जो ड्राइवर इस शर्त को पूरा नहीं कर पाएंगे, उनके लाइसेंस या परमिट रद्द किए जा सकते हैं। सरकार ने यह भी साफ किया है कि लापरवाही बरतने वाले परिवहन अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई होगी जिन्होंने बिना जांच के लाइसेंस जारी किए हैं।
नियम के पीछे का कारण और पुरानी शर्तें
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के अनुसार, महाराष्ट्र मोटर वाहन नियम 1989 के नियम 24 के तहत स्थानीय भाषा का ज्ञान हमेशा से जरूरी था। नवंबर 2019 में इसमें बदलाव कर नियमों को और सख्त किया गया था। मुंबई, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर जैसे शहरों से यात्रियों की शिकायतें आ रही थीं कि ड्राइवर मराठी में बात नहीं कर पाते। सरकार का मानना है कि जिस राज्य में लोग अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं, वहां की भाषा का सम्मान करना और उसे सीखना उनकी जिम्मेदारी है।
ड्राइवरों की प्रतिक्रिया और अन्य जानकारियां
- मीरा भायंदर में पायलट वेरिफिकेशन ड्राइव पहले से चल रहा है जो 1 मई तक जारी रहेगा।
- मुंबई रिक्शामेन यूनियन और बीजेपी के मुंबई टैक्सी-ऑटो रिक्शा सेल ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है।
- समाजवादी पार्टी नेता अबू आसिम अजमी ने भी इस कदम की आलोचना की है।
- कुछ यूनियन्स अब अपने ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा की ट्रेनिंग आयोजित करने की योजना बना रहे हैं।