Maharashtra: राज्य सरकार ने ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य करने का फैसला किया है। इस नियम के तहत परमिट जारी करने और रिन्यू कराने के लिए मराठी भाषा की जानकारी होना जरूरी होगा। हालांकि,
Maharashtra: राज्य सरकार ने ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य करने का फैसला किया है। इस नियम के तहत परमिट जारी करने और रिन्यू कराने के लिए मराठी भाषा की जानकारी होना जरूरी होगा। हालांकि, इस फैसले के बाद विवाद शुरू हो गया है और शिवसेना नेता संजय निरुपम ने सरकार से इस आदेश की समीक्षा करने की मांग की है।
ड्राइवरों के लिए क्या हैं नए नियम और शर्तें?
महाराष्ट्र सरकार ने मोटर वाहन नियमों में बदलाव के लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके तहत नियम 4, 78 और 85 में संशोधन किया जाएगा। सरकार की योजना थी कि 1 मई 2026 से इसे लागू किया जाए और सभी 59 आरटीओ (RTO) में इसकी जांच हो। इसके लिए ड्राइवरों को एक भाषा परीक्षा पास करनी होगी, जिसके बिना उन्हें परमिट नहीं मिलेगा।
संजय निरुपम और अन्य विशेषज्ञों का क्या कहना है?
शिवसेना नेता Sanjay Nirupam ने परिवहन मंत्री Pratap Sarnaik को पत्र लिखकर कहा है कि भाषा प्यार से सिखाई जानी चाहिए, डर से नहीं। उन्होंने मांग की है कि ड्राइवरों के लिए ‘काम चलाने लायक’ या टूटी-फूटी मराठी को भी स्वीकार किया जाए, ताकि हजारों गैर-मराठी ड्राइवरों की रोजी-रोटी पर असर न पड़े। वहीं, वकील Gunaratna Sadavarte ने इस अनिवार्य परीक्षा को असंवैधानिक बताया है।
सरकार ने अब क्या रास्ता निकाला है?
ड्राइवर यूनियनों द्वारा 4 मई से राज्यव्यापी हड़ताल की चेतावनी के बाद सरकार ने अपना रुख नरम किया है। अब सरकार ड्राइवरों को मुफ्त ट्यूशन देने की योजना बना रही है। इस संबंध में मुख्य विवरण नीचे दिए गए हैं:
| विवरण |
जानकारी |
| प्रस्तावित समाधान |
ड्राइवरों को मुफ्त मराठी भाषा की ट्रेनिंग |
| ट्रेनिंग देने वाली संस्थाएं |
मुंबई मराठी साहित्य संघ और कोंकण मराठी साहित्य परिषद |
| महत्वपूर्ण बैठक |
28 अप्रैल 2026 को मंत्री और यूनियनों की मीटिंग |
| 1 मई का अपडेट |
केवल जरूरी दस्तावेजों की जांच होगी, भाषा टेस्ट टल सकता है |