Maharashtra: मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने राज्य में महिलाओं के लिए संसद में 33% आरक्षण दिलाने के मकसद से एक बड़ा अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। Mahayuti गठबंधन इस मुहिम के जरिए देशभर की महिलाओं का समर्थन जुटाना चा
Maharashtra: मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने राज्य में महिलाओं के लिए संसद में 33% आरक्षण दिलाने के मकसद से एक बड़ा अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। Mahayuti गठबंधन इस मुहिम के जरिए देशभर की महिलाओं का समर्थन जुटाना चाहता है। यह कदम तब उठाया गया है जब 17 अप्रैल को लोकसभा में आरक्षण से जुड़ा एक अहम बिल गिर गया था।
महिला आरक्षण बिल को लेकर क्या है पूरा विवाद?
केंद्र सरकार ने 2029 के आम चुनाव से पहले महिलाओं को 33% कोटा देने के लिए Constitution (131st Amendment) Bill, 2026 पेश किया था। लेकिन 17 अप्रैल 2026 को यह बिल लोकसभा में गिर गया। बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जबकि इसे पास होने के लिए 352 वोटों की जरूरत थी। मुख्यमंत्री Fadnavis ने इस दिन को लोकतंत्र के लिए काला दिन बताया और विपक्ष पर महिलाओं को धोखा देने का आरोप लगाया।
Mahayuti के अभियान और विरोधियों की चुनौती में क्या है खास?
महायुति गठबंधन अब महाराष्ट्र की करीब 1 करोड़ महिलाओं के हस्ताक्षर जुटाकर इस बिल के समर्थन में अपनी ताकत दिखाएगा। इस अभियान की शुरुआत के लिए आज 21 अप्रैल को Mumbai में एक बड़ा रैली और महिलाओं का मार्च निकाला जाएगा। इस मुद्दे पर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है और मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
- Fadnavis ने विपक्षी नेताओं को सार्वजनिक बहस के लिए चुनौती दी है।
- NCP (SP) की सांसद Supriya Sule और कांग्रेस की सांसद Praniti Shinde ने इस चुनौती को स्वीकार कर लिया है।
- सरकार का लक्ष्य है कि आरक्षण को 2026 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना से जोड़कर जल्द लागू किया जाए।
आरक्षण बिल और जनगणना का क्या संबंध है?
नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 लागू तो हो गया है, लेकिन इसका फायदा मिलने के लिए पहले परिसीमन (delimitation) होना जरूरी है, जो अगली जनगणना के बाद होता है। सरकार ने इसे तेज करने के लिए Delimitation Bill, 2026 पेश किया था ताकि आरक्षण को पुराने डेटा के आधार पर जल्द लागू किया जा सके। सरकार ने आम लोगों की समझ के लिए इस मुद्दे पर FAQ भी जारी किए हैं।