Maharashtra : राज्य सरकार की कोशिशों के बावजूद लड़कियों में सर्वाइकल कैंसर से बचाने वाली HPV वैक्सीन की रफ्तार बहुत धीमी है। सोशल मीडिया पर फैल रही गलत खबरों और अफवाहों की वजह से माता-पिता अपनी बेटियों को टीका लगवाने से
Maharashtra : राज्य सरकार की कोशिशों के बावजूद लड़कियों में सर्वाइकल कैंसर से बचाने वाली HPV वैक्सीन की रफ्तार बहुत धीमी है। सोशल मीडिया पर फैल रही गलत खबरों और अफवाहों की वजह से माता-पिता अपनी बेटियों को टीका लगवाने से डर रहे हैं। मुंबई जैसे बड़े शहर में भी लक्ष्य के मुकाबले बहुत कम लड़कियों का टीकाकरण हुआ है।
वैक्सीन को लेकर क्या है भ्रम और कितनी है स्थिति?
इंटरनेट और WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म पर यह अफवाह फैल रही है कि इस वैक्सीन से लड़कियों में बांझपन (infertility) हो सकता है। इसी डर की वजह से महाराष्ट्र में वैक्सीनेशन की रफ्तार गिरी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक स्थिति कुछ ऐसी है:
| क्षेत्र |
लक्ष्य (Target) |
कितने टीके लगे |
| मुंबई |
1.06 लाख |
568 |
| पूरा महाराष्ट्र |
9,84,414 |
27,956 |
यह आंकड़े 10 अप्रैल 2026 तक के हैं। बता दें कि भारत सरकार ने 28 फरवरी 2026 को देशभर की 14 साल की लड़कियों के लिए यह मुफ्त अभियान शुरू किया था।
क्या यह वैक्सीन सुरक्षित है और एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
AIIMS दिल्ली के डॉ. अभिषेक शंकर ने साफ किया है कि वैक्सीन और बांझपन के बीच कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर चल रही बातें सिर्फ सुनी-सुनाई हैं, जिनका कोई डेटा नहीं है। WHO और भारत सरकार की स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस वैक्सीन को सुरक्षित माना है।
- यह वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर के खतरे को कम करती है।
- सरकारी केंद्रों पर Gardasil-4 वैक्सीन मुफ्त दी जा रही है।
- टीका लगवाने के लिए माता-पिता की सहमति जरूरी है।
- हल्का बुखार या इंजेक्शन वाली जगह पर सूजन जैसे सामान्य लक्षण हो सकते हैं।
वैक्सीन अभियान की मुख्य बातें क्या हैं?
भारत सरकार का लक्ष्य करीब 1.2 करोड़ लड़कियों को इस टीके से सुरक्षित करना है। स्वास्थ्य मंत्रालय इस प्रोग्राम के जरिए महिलाओं में होने वाले दूसरे सबसे आम कैंसर यानी सर्वाइकल कैंसर को रोकना चाहता है। ASHA वर्कर्स जमीन पर काम कर रही हैं, लेकिन सोशल मीडिया की अफवाहों की वजह से उन्हें माता-पिता को समझाने में काफी मुश्किल आ रही है।