Maharashtra: राज्य के किसानों के लिए मधुमक्खी पालन अब सिर्फ शहद बेचने का जरिया नहीं, बल्कि कमाई बढ़ाने का बड़ा तरीका बन गया है। हाल ही में अहमदाबाद में हुए एक बड़े संवाद कार्यक्रम में बताया गया कि मधुमक्खियां खेती को टिक
Maharashtra: राज्य के किसानों के लिए मधुमक्खी पालन अब सिर्फ शहद बेचने का जरिया नहीं, बल्कि कमाई बढ़ाने का बड़ा तरीका बन गया है। हाल ही में अहमदाबाद में हुए एक बड़े संवाद कार्यक्रम में बताया गया कि मधुमक्खियां खेती को टिकाऊ बनाने और किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। इससे न केवल शहद से पैसा मिल रहा है, बल्कि फसलों की पैदावार में भी अच्छी बढ़ोतरी देखी गई है।
मधुमक्खी पालन से किसानों को क्या फायदा हुआ
महाराष्ट्र और गुजरात के किसानों ने अपने अनुभव साझा किए कि मधुमक्खी पालन की वजह से उनकी फसलों में परागण (pollination) बेहतर हुआ है। इससे बैंगन, मिर्च, कद्दू और कुंदरू जैसी फसलों की पैदावार में 10% से 20% तक की वृद्धि हुई है। हालांकि, जलवायु परिवर्तन और बेमौसम बारिश ने कुछ चुनौतियों को भी बढ़ाया है, जिससे कुछ इलाकों में शहद के उत्पादन और फसलों पर असर पड़ा है।
Maharashtra सरकार की योजनाएं और मदद
महाराष्ट्र सरकार मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है। राज्य के खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से ट्रेनिंग और सब्सिडी दी जा रही है।
- ट्रेनिंग पूरी करने वालों को मधुमक्खी कॉलोनियों पर 50% सब्सिडी मिलती है।
- राज्य का खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड क्वालिटी चेक के बाद ऑर्गेनिक शहद 500 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदता है।
- महाबलेश्वर में एक समर्पित शहद निदेशालय (Honey Directorate) काम कर रहा है।
- सरकार मधुमक्खी पालन के लिए एक एकीकृत नीति और रजिस्ट्रेशन पोर्टल लाने की तैयारी में है।
विशेषज्ञों की राय और भविष्य की रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि परागण को खेती का पांचवां जरूरी इनपुट माना जाना चाहिए। Under The Mango Tree Society जैसी संस्थाएं आदिवासी जिलों में देशी मधुमक्खियों के पालन को बढ़ावा दे रही हैं। इसके अलावा, पुणे स्थित Central Bee Research and Training Institute (CBRTI) और अन्य कृषि विश्वविद्यालय इस क्षेत्र में रिसर्च कर रहे हैं ताकि जलवायु परिवर्तन के असर को कम किया जा सके और देशी फूलों की खेती बढ़ाई जा सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
महाराष्ट्र में मधुमक्खी पालन के लिए सरकार क्या मदद दे रही है?
महाराष्ट्र सरकार 10 दिन का ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाती है और ट्रेनिंग पूरी करने वाले लोगों को मधुमक्खी कॉलोनियों पर 50% सब्सिडी देती है। साथ ही, ऑर्गेनिक शहद को 500 रुपये प्रति किलो के भाव पर खरीदा जाता है।
मधुमक्खी पालन से फसलों की पैदावार पर क्या असर पड़ता है?
बेहतर परागण की वजह से बैंगन, मिर्च और कद्दू जैसी फसलों की पैदावार में 10% से 20% तक की वृद्धि देखी गई है।